
अंधे हत्याकांड का एक सप्ताह में पुलिस ने किया खुलासा
बालाघाट. मॉयल नगरी भरवेली में 10 मार्च की रात एक युवक के अंधे हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने किया। मृतक वार्ड नंबर 4 उडिय़ा मोहल्ला निवासी छोटू मद्रासी उर्फ उर्फ दुर्गाप्रसाद शिववंशी की हत्या के आरोपी ज्ञानप्रकाश उर्फ दारासिंह सोनकलिहारी को गिरफ्तार किया है।
इस संबंध में नगर पुलिस अधीक्षक सुमित केरकेट्टा ने बताया कि १० मई की रात करीब ११ बजे छोटू मद्रासी को अज्ञात व्यक्ति द्वारा धारदार हथियार से वार कर घायल कर दिया गया था। जिसकी उपचार के लिए गोंदिया ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई थी। मामले की सूचना पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना की जा रही थी। जिसमें पुलिस महानिरीक्षक द्वारा शीघ्र मामले का खुलासा करने व आरोपी को गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया था। जिसके परिपालन में पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी के निर्देशन व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिपालसिंह महोबिया के मार्गदर्शन में सीएसपी सुमित केरकेट्टा, भरवेली थाना प्रभारी राजेन्द्र नरवरिया के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। आरोपी की पतासाजी की गई। इस दौरान जानकारी मिली कि आरोपी ज्ञानप्रकाश का घटना से पूर्व मृतक छोटू मद्रासी के साथ विवाद हुआ था। ज्ञानप्रकाश को उस रात घटना स्थल के आस-पास देखा गया था। जिससे ज्ञानप्रकाश को अभिरक्षा में लेकर बारिकी से पूछताछ की गई। जिसके द्वारा हत्या करना स्वीकार किया गया। बताया गया कि घटना दिनांक को ज्ञानप्रकाश घर के बाहर लघुशंका कर रहा था। इस दौरान छोटू मद्रासी शराब के नशे में घर के सामने निकला और ज्ञानप्रकाश को अपशब्द बोलने लगा जिससे दोनों के बीच विवाद हुआ। उसके पूर्व भी कई बाद छोटू आते-जाते गाली देते रहता था जिससे रंजिश बनी हुई थी। इसी रंजिश के चलते ज्ञानप्रकाश रात करीब ११ बजे घर से कत्त्ता (बका) लेकर निकला तो रोड सुनसान थी। छोटू मद्रासी शराब के नशे में अपशब्द बोलते हुए चला जा रहा था। ज्ञानप्रकाश छोटू मद्रासी के पास गया और गुड्डीबाई के घर के सामने हत्या करने की मंशा से चेहरे व मुहं पर कत्ता से वार कर दिया। छोटू को गुड्डीबाई के घर की दीवार पर धक्का देकर पटक भागकर अपने घर आ गया। पुलिस ने हत्या में उपयोग किया गया कत्ता व घटना के समय पहने हुए कपड़ा भी बरामद किया। आरोपी को पकडऩे में भरवेली थाना प्रभारी राजेन्द्र नरवरिया, उपनिरीक्षक मोहम्मद शाहिद, एएसआई विनोद साव, प्रधान आरक्षक राजू दाहिया, रतिराम गौतम, धनराजसिंह उइके, आरक्षक रामसिंह आहके, जितेन्द्र यादव, विश्वनाथ बघेल का योगदान रहा।
Published on:
18 May 2020 10:12 am
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