
बीमारी परोस रही जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर की मेडिकल वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट व्यवस्था-
जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर की मेडिकल वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट व्यवस्था मर्ज बढ़ाने का काम कर रही है। यहां के दृश्य देखकर मरीज और उनके परिजनों का कुछ ऐसा ही कहना आ रहा है। दरअसल जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर की ओटी, पैथौलॉजी गायनिक और सर्जरी सहित अन्य वार्डो से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के दूषित पानी के ट्रीटमेंट में कई तरह की अव्यवस्थाएं नजर आती हैं। इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी भी नजर आती है। बावजूद इसके जिम्मेदारों का ध्यान यहां तक नहीं जा पाया है। वर्षो से जर्जर लीकेज पाइप लाइन से वेस्ट वॉटर की निकासी हो रही है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर मेडिकल वेस्ट वॉटर से संक्रमण फैलने का खतरा नजर आता है।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ निलय जैन के अनुसार जिला अस्पताल में अधिकांश तह गायनिक, पैथौलॉजी, ओटी और जहां प्राथमिक उपचार किया जाता है वहां से मेडिकल वेस्ट वाटर की निकासी और ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है। इन वार्डो और ट्रामा सेंटर में पाइप लाइन की ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, ताकि ट्रीटमेंट युक्त दूषित पानी निकासी होकर सीधे ईटीपी प्लांट (इफ्लुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) अपशिष्ट उपचार संयंत्र में स्टोर होकर नगरपालिका की नालियों में पहुंचता है। इस प्रक्रिया के कारण संक्रमण फैलने व जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों की अवहेलना जैसे मामले नहीं के बराबर हो जाते हैं।
मेडिकल वेस्ट वॉटर निकासी को लेकर पत्रिका ने पड़ताल की। इस दौरान बाहर से तो व्यवस्था देखने पर दुरूस्त नजर आती है। लेकिन मौके पर देखने पर व्यवस्थाओं की पोल खुलते नजर नजर आती है। मेडिकल वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट की प्रक्रिया वर्षो पुरानी जर्जर प्लास्टिक की पाइप लाइन और नालियों के भरोसे हो रही है। कई स्थानों पर संक्रमण युक्त दूषित जल लीकेज होकर परिसर और वार्डो के किनारे तक फैल रहा है। अस्पताल परिसर के अंदर नालियां भी कई स्थानों पर खुली और गंदगी व वेस्ट से बजबजाती नजर आती हैं।
अस्पताल के कर्मचारी मोहसीन खान ने बताया कि मेडिकल वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट की व्यवस्था अस्पताल के प्रबंधक इरफान बेग संभाले हुए हैं। मोहसीन ने बताया कि नियमित तौर पर वेस्ट ट्रीटमेंट व्यवस्था का मुआयना किया जाता है। हर तीन माह में मेंटनेंस कार्य भी करवाए जाते हैं। लेकिन मौका स्थल पर मेंटनेंस व्यवस्थाओं के हाल बेहाल नजर आए। खुली नालियों से निकासी और लीकेज को लेकर जिम्मेदार जवाब देने से बचते नजर आए।
मेडिकलवेस्ट वॉटर निकासी के सबसे बुरे हाल जिला अस्पताल के पीछे बने पोस्टमार्टम कक्ष के नजर आते हैं। बूढ़ी रोड के फुटकर दुकानदारों और रहवासियों की माने तो पोस्टमार्टम घर का दूषित पानी ट्रीटमेंट न होकर सीधे सडक़ किनारे की नालियों में बहा दिया जा रहा है। खासकर बारिश के दिनों में मेडिकल वेस्ट का दुर्गंध व केमीकल युक्त पानी नाली भरने पर सडक़ और वार्डो तक प्रवेश करता है। इस दौरान संक्रमण व महामारी का खतरा बढ़ जाता है। इस मामले को लेकर पूर्व में आवेदन निवेदन भी किए जा चुके हैं। इसके अलावा शहर के समीपस्थ के कोसमी व गायखुरी संजीवनी व आरोग्य केन्द्रों में वाटर ट्रीटमेंट से संबंधित व्यवस्थाएं दिखाई नहीं देती है। हालाकि स्वास्थ्य महकमें के अनुसार यहां इस तरह की आवश्यकता नहीं होती है।
वर्सन
जिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर वेस्ट वॉटर निकासी को लेकर पूरे इंतजाम हैं। चोरों तरह ईटीपी प्लांट बने हुए हैं। वार्डो में भी इस्टूमेंट ब्वाइल किए जाते हैं। वेस्ट पानी में क्लोरीन के साथ निकासी की जाती है। समय समय पर मेंटनेंस कार्य भी किया जाता है।
मोहसीन खान, व्यवस्थापक
मेडिकल वेस्ट वॉटर निकासी को लेकर समुहित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ट्रामा व अस्पताल में ईटीपी प्लांट बने हुए हैं। अस्पताल से निकलने वाले वेस्ट वाटर का नियमों के तहत ट्रीटमेंट के बाद ही निकासी होती है।
डॉ निलय जैन, सिविल सर्जन
Updated on:
17 Jan 2026 03:30 pm
Published on:
17 Jan 2026 03:30 pm
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