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स्कूल में नहीं शिक्षक अभिभावक बच्चों को घर ले गए

अभिभावकों ने पत्र लिखकर शिक्षक पदस्थ करने की रखी थी मांग

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स्कूल में नहीं शिक्षक अभिभावक बच्चों को घर ले गए

कटंगी। क्षेत्र के शासकीय माध्यमिक शाला सादाबोड़ी में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक मौजूद नहीं तो अभिभावक अपने बच्चों को घर ले आए। इन अभिभावकों की जिद है कि जब तक शिक्षक पदस्थ नहीं होंगे तब तक वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। अभिभावकों ने यह कदम तब उठाया जब उन्होंने एक सप्ताह पहले संकुल प्राचार्य तिरोड़ी, जनशिक्षा केन्द्र बम्हनी, विखं स्रोत समन्वयक और विधायक को एक पत्र लिखा था। जिसमें अभिभावकों ने शिक्षकों के पदस्थापना कराने की मांग की थी। लेकिन सप्ताह बीतने के बाद भी उनकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अभिभावकों को शायद इस बात की जानकारी अब भी नहीं है कि विधायक शिक्षक की व्यवस्था कराने में सक्षम नहीं है। वह स्कूल में शिक्षक की व्यवस्था कराने के लिए सक्षम अधिकारी को पत्र लिखने की बजाए गांव के सरपंच को पत्र लिखते हैं।
शाला समिति अध्यक्ष मावनराव गोपाले एवं अभिभावक योगेन्द्र कुथे, रेेकसिंह बोपचे, रविन्द्र ठवकर, नंदकिशोर नेवारे, रामकला सेन्दरे, ज्योति नेवारे, गोविंद सेन्दरे, संजय भंडारी, कोमल ठवकर, अरूण सोनवाने, सोनू ठवकर सहित अन्य अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे माध्यमिक शाला सादाबोड़ी में अध्ययन करते हैं। इस शाला में कक्षा 6 वीं से लेकर 8वीं तक की कक्षाएं लगती है। जिन्हें पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक पदस्थ है। इस शिक्षक के पास पढ़ाई के साथ अन्य गैरशैक्षणिक कार्य, कार्यालयीन कार्यो का भार भी है। इस कारण वह पढ़ाई नहीं करा पाते कई दफे जरुरी काम होने पर जल्दी छुट्टी कर संकुल तथा जनशिक्षा केन्द्र चले जाते हैं। मंगलवार को शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आए। इसके बाद वह सभी स्कूल गए और अपने बच्चों को वापस घर ले आए।
४६ बच्चे शिक्षणरत
प्राप्त जानकारी अनुसार माध्यमिक शाला सादाबोड़ी में कुल 46 विद्यार्थी अध्ययनरत है। यह सभी मजदूर, गरीब और किसानों के बच्चे हैं। जिनका सपना पढ़-लिखकर अपना तथा अपने परिवार का भविष्य संवारना है। लेकिन शासन और सिस्टम की लापरवाही ने इन बच्चों को विकलंाग बना दिया है। राज्य सरकार के शिक्षा में सुधार के दावे केवल सरकारी दस्तावेजों और शाला भवनों के निर्माण में ही दिखाई दे रहे हैं। इस विखं की जमीनी हकीकत तो यही है कि सरकार के अधिकांश प्राथमिक तथा माध्यमिक शालाओं में अध्ययन करने वाले बच्चे बड़े अफसर तो दूर किसी कार्यालय के भृत्य बनने लायक भी शिक्षा अर्जित नहीं कर पा रहे हैं।
इनका कहना है।
शासन के नियमानुसार सादाबोड़ी में दो स्कूलों का संविलियन किया गया है। शीघ्र ही पढ़ाई व्यवस्था सुचारू रुप से शुरू हो सकेगी।
दर्पण गौतम, विखं स्त्रोत समन्वयक कटंगी