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सोनोग्राफी के लिए हजार रुपए खर्च

बदहाल स्वास्थ्य सेवा, दावा अच्छी स्वास्थ्य सेवा का मगर शहर से लेकर गांव तक बदहाली

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सोनोग्राफी के लिए हजार रुपए खर्च

कटंगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के भले ही लाख दावे करते हो। मगर, यहां विधानसभा क्षेत्र कटंगी में उनके दावे पूरी तरह से खोखले और झूठे साबित हो रहे हैं। आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि ढाई लाख की आबादी वाले सरकारी अस्पताल कटंगी में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए सोनोग्राफी मशीन नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं सोनोग्राफी के लिए 1 हजार रुपए से लेकर 15 सौ रुपए तक प्राईवेट अस्पतालों में खर्च कर रही है या फिर जिला अस्पताल बालाघाट में सोनोग्राफी के लिए अपनी पारी आने का इंतजार करती है। चुकिं जिला अस्पताल में तमाम शहर गांव से महिलाएं पहुंचती हैं। इस व्यवस्था में नंबर पाने के लिए गर्भवती महिलाओं को लंबी जद्दोजहद से गुजरना पड़ता है। चौकानें वाली बात तो यह है कि स्थानीय नेता कटंगी अस्पताल को सिविल का दर्जा दिलाने के ख्याली ख्वाब दिखाएं जा रहे हैं। लेकिन सुविधाओं को पर किसी का ध्यान नहीं है।
प्रतिदिन 25 महिलाओं की सोनोग्राफी-
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि प्रतिदिन 25 से 30 गर्भवती महिलाएं सोनोग्राफी के लिए बालाघाट के प्राईवेट अस्पतालों में जाती है। जहां पर सोनोग्राफी के लिए महिलाओं से 1 हजार रुपए से लेकर 15 सौ रुपए तक लिए जाते हैं। शहर की एक महिला चिकित्सक ने बताया कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में गर्भाशय में शिशु की स्थिति का पता लगाने, शिशु की धड़कन का पता लगाने, शिशु के जन्म की सही नियत तिथि का पता लगाने, गर्भ में कितने शिशु पल रहे हैं यह जानकारी हासिल करने सहित महिलाएं व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए सोनोग्राफी करवाती है।
शल्यक्रिया से नहीं हो रहे प्रसव-
सरकारी अस्पताल कटंगी में दशकों बाद गर्भवती महिलाओं का शल्यक्रिया (आपरेशन से डिलीवरी) से प्रसव की शुरूआत की गई थी, इसके लिए बकायदा अस्पताल में महिला चिकित्सक को पदस्थ भी किया गया था और खूब वाही वाही बटोरी गई थी। लेकिन अब बीते 12 माह से अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के आपरेशन ही नहीं हो रहे हैं। जानकारी अनुसार एनस्थिसिया लॉजिस्ट नहीं होने के कारण महिला चिकित्सक गर्भवती महिलाओं के आपरेशन कर डिलीवरी नहीं कर पा रही है। फिलहाल गर्भवती महिलाओं को मुख्यालय से 45 किमी. दूर जिला मुख्यालय बालाघाट रेफर किया जाता है। जिसमें गर्भवती महिला की जान जाने और रास्ते में ही प्रसव होने का खतरा हमेशा बना रहता है। बहरहाल, पूर्व में घटित ऐसी घटनाओं से सत्तारुढ़ पार्टी और विपक्षी पार्टी के नेताओं और अफसरों ने कोई सबक नहीं लिया है।
ग्रामीण अस्पतालों के बुरे हाल-
नगर के सरकारी अस्पताल के अलावा क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उपस्वास्थ्य केन्द्रों के भी बहुत बुरे हाल है। पठार अंचल में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है। कई बार एक्सपायरी डेट की दवा तक दिए जाने की शिकायतें ग्रामीणों द्वारा की जाती रही है। बहरहाल, जो स्थिति सरकारी अस्पताल कटंगी की है, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती, क्योंकि हर जगह से हार कर मरीज बड़ी आशा के साथ यहां पहुंचते हैं। लेकिन फिर भी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है। ऐसे हालात के लिए नेता और नौकरशाही जिम्मेदार है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि अस्पताल मरीजों के लिए है पर उसके बारे में सोचने वाला कोई नहीं। व्यवस्था, सुरक्षा, स्टाफ की कमी तो गिनाई जाती है। पर मरीजों की बेहतरी के लिए गंभीरता कहीं दिखाई नहीं देती और इन कमियों का खमियाजा मरीजों की ही चुकाना पड़ता है। विडंबना है कि लंबे समय से इस तरह के हालात का सामना करने को क्षेात्रवासी मजबूर हैं।
इनका कहना है।
एनस्थिसिया लॉजिस्ट नहीं होने के कारण सीजर नहीं हो पा रहा है। कटंगी में सीजर शुरू करवाने के लिए शीघ्र ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाएगी। चिकित्सकों की कमी के कारण परेशानियां आ रही है।
डॉ मनोज पांडे, सीएमएचओ