
आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की जयंती
बालाघाट. शहर के इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय में इस वर्ष भी आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की जयंती मनाई गई। इस दौरान प्रमुख रूप से प्रो. एलसी जैन सेवा निवृत्त प्राचार्य मुख्य अतिथि के रूप में व अन्य अतिथियों में सुभाष गुप्ता, डॉ संतोष सक्सेना, कुलदीप बिल्थरे आदि उपस्थित रहे।
आचार्य डॉ वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो का जन्म 15 नवम्बर 350 ईसवी में सरगुजा जिले के उदयपुर तहसील से रामायण कालीन मिलगादाह गांव में हुआ था। कालीदास मूलत: संस्कृत के कवि एवं नाटककार के रूप में प्रख्यात हुए। उनका लेखन मधुर, साहित्य शैली से भरपूर सारग्रंथ हैं। डॉ गहरवार ने बताया कि पंडो 369 ईसवी में वाराणसी चले गए तथा 6 वर्षों तक संस्कृत का अध्ययन किया। वे 375 ईसवी में संस्कृत में पारंगत होकर मृगाडांड वापस आए। मृगाडांड के सरहद में स्थित रामगिरी पर्वत रामगढ़ पर्वत की राम गुफा में बैठकर ऋतुसहांर, मेधदुतम् तथा अभिज्ञान शाकुंतलम कुल तीन ग्रंथों की रचना की।
इसी प्रकार अन्य अतिथियों ने भी आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की जयंती पर विचार पेश किए। इस दौरान कंचन सिंह ठाकुर, हरिलाल नगपुरे, मनीष इनवाती, अखिलेश कुमार पटले, भोलाप्रसाद मिश्रा, अंकित उपाध्याय आदि उपस्थित थे।
Published on:
17 Nov 2019 04:54 pm
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