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गौमाता की अनोखी विदाई : गाजे – बाजे से हुआ अंतिम संस्कार, 14 लोगों ने कराया मुंडन, मृत्यु भोज भी हुआ, VIDEO

यहां गाय की मौत के बाद गांव के लोगों ने न सिर्फ नम आंखों से उसे अंतिम विदाई देते हुए उसका अंतिम संस्कार किया, बल्कि गांव के करीब 14 लोगों ने परिवार के सदस्य के समान अपना मुंडन भी कराया।

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गौमाता की अनोखी विदाई : गाजे - बाजे से हुआ अंतिम संस्कार, 14 लोगों ने कराया मुंडन, मृत्यु भोज भी हुआ, VIDEO

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में गौमाता की अनोखे ढंग से अंतिम विदाई देखने को मिली है। अभी तक आपने मनुष्य को अपनों के प्रति हमेशा अच्छे काम करते देखा होगा, लेकिन कुछ प्रेम हमेशा मनुष्य के प्रति ही नहीं, बल्कि कुछ मुक जीवो के प्रति भी रखते हैं। ऐसा ही प्रेम का अजब मामला जिले के ग्राम हट्टा में देखने को मिला। यहां गाय की मौत के बाद गांव के लोगों ने न सिर्फ नम आंखों से उसे अंतिम विदाई देते हुए उसका अंतिम संस्कार किया, बल्कि गांव के करीब 14 लोगों ने परिवार के सदस्य के समान अपना मुंडन भी कराया। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है।

आपको बता दें कि, बालाघाट जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम हट्टा में एक गाय को लोग प्यार से 'घंटीलाल' बुलाया करते थे। यही नहीं, गांव के लोग उसे पूजनीय मानते हुए अपनी खुशी से उसे कुछ न कुछ खाने को दिया भी करते थे। हालांकि, बीते कुछ दिनों से घंटीलाल की तबियत ठीक नहीं थी और बीते 12 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। गौमाता की मौत के बाद ग्रामीणों ने उसे गाने बाजे के साथ नम आंखों से न सिर्फ अंतिम विदाई दी, बल्कि उसका अंतिम संस्कार किया और नियम अनुसार उसकी तेरहवी भी की। यही नहीं, गांव के ही करीब 14 लोगों ने अपना मुंडन भी करवाया। ग्रामीणों के इस कार्य की हर और सराहना की जा रही है।

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पूरे गांव ने पैसे इकट्ठे कर किया गौमाता का मृत्युभोज

गांव के एक युवक कुशीलाल का कहना है कि, गाय लॉकडाउन के दौरान कहीं से गांव में आ गई थी। हालांकि, उस दौरान वो काफी कमजोर थी। लेकिन, तभी से पूरा गांव ही उसका परिवार था। ग्रामीणों द्वारा ही उसका पालन पोषण किया जाता था। यही नहीं, ग्रामीणों द्वारा उसे 'घंटीलाल' नाम भी दिया गया। खास बात ये है कि, नामकरण के बाद से ही वो इस नाम से खुद को पहचानने लगी थी और सभी लोगों में घुल मिल सी गई थी। लेकिन जब गाय ने अंतिम सांस ली तो ग्रामीणों ने मिलकर उसका अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। ये ग्रामीणों का उससे प्रेम ही था, जिसके कारण नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी गई। यही नहीं, हिंदू रीति रिवाज के अनुसार कई लोगों ने मुंडन भी कराया और ग्रामीणों ने गांव भर से पैसे इकट्ठे कर उसका मृत्युभोज भी करवाया है।

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