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बिजली, पानी, सड़क की सुविधा लेकिन गांव में नहीं बसना चाहते ग्रामीण

वन विभाग कर रहा विस्थापन का प्रयास, अनुमति का इंतजारलालबर्रा क्षेत्र के वन ग्राम चिखलाबड्डी का मामला

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बिजली, पानी, सड़क की सुविधा लेकिन गांव में नहीं बसना चाहते ग्रामीण

बिजली, पानी, सड़क की सुविधा लेकिन गांव में नहीं बसना चाहते ग्रामीण

बालाघाट. ग्रामीणों को बिजली, पानी और गांव में पक्की सड़क की सुविधा तो मिली है। लेकिन ग्रामीण गांव में बसना नहीं चाहते हैं। वन विभाग विस्थापन का प्रयास कर रहा है। लेकिन शासन की ओर से अभी तक अनुमति नहीं मिल पाई है। आज भी ग्रामीण विस्थापन होने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों के विस्थापन की प्रक्रिया पांच वर्ष पूर्व से की जा रही है। लेकिन आदेश पर अभी तक मुहर नहीं लग पाई है। मामला जिले के लालबर्रा क्षेत्र ग्राम पंचायत टेकाड़ी के वनग्राम चिखलाबड्डी का है।
जानकारी के अनुसार दक्षिण सामान्य वन मंडल लालबर्रा के सोनेवानी का पूरा जंगल पेंच कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है। इसी पेंच कॉरिडोर में ग्राम पंचायत टेकाड़ी का वन ग्राम चिखलाबड्डी सालों से जंगल के बीच बसा हुआ है। यहां करीब 36 बैगा आदिवासी परिवार निवास करते हैं। गांव की आबादी करीब दो सैकड़ा है। लेकिन अब ये ग्रामीण गांव छोडऩा चाहते हैं। हिंसक वन्य जीवों का हमला और रोजगार की कमी ग्रामीणों की प्रमुख समस्या है। कहने के लिए गांव में प्राथमिक शाला, उपस्वास्थ्य केन्द्र और आंगनबाड़ी केन्द्र का संचालन हो रहा है। लेकिन यहां पर न तो स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाती है और न ही ग्रामीणों के शिक्षा का स्तर बेहतर है।
रोजगार की कमी, आवागमन के साधन शून्य
गांव में बैगा आदिवासियों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। रोजगार की कमी बनी हुई है। वनोपज के सहारे ग्रामीण अपनी आजीविका चला रहे हैं। इतना ही नहीं गांव पहुंचने के लिए आवागमन के साधन शून्य है। आवश्यक कार्य होने के चलते ही ग्रामीण शहरी क्षेत्र की ओर आते हैं। गांव जंगल में बसा होने के कारण ग्रामीण बाहर आना-जाना बहुत ही कम करते हैं। यह कॉरीडोर वाला जंगल होने से वन्य प्राणियों की संख्या अधिक है। जिसके चलते हमला होने की संभावना भी अधिक बनी रहती है। बारिश के दिनों में ग्रामीण अपने ही गांव में कैद होकर रह जाते हैं। यह समस्या वर्षों से बनी हुई है।
राजस्व ग्राम में बसाने की मांग
ग्रामीणों वन ग्राम चिखलाबड्डी से विस्थापित कर उन्हें राजस्व ग्राम में बसाने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव जंगल के बीच बसा होने के चलते उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की समस्या सबसे प्रमुख है। ग्रामीण रोजगार के लिए पलायन करते हैं। यदि गांव को राजस्व ग्राम में विस्थापित कर दिया जाए तो उन्हें इन सब समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।
इनका कहना है
जंगलों के बीच गांव बसा हुआ है। हिंसक वन्य जीव गांव में प्रवेश कर जाते हैं। अनेक बार हमला कर ग्रामीणों को घायल कर चुके हैं। गांव को राजस्व ग्राम या अन्यत्र विस्थापित कर देते हैं तो इन समस्याओं से उन्हें छुटाकारा मिल जाएगा।
-गायन सिंह टेकाम, ग्रामीण
गांव में रोजगार की कमी है। ग्रामीण वनोपज के सहारे अपनी जीविका चलाते हैं। महानगरों में जाकर मजदूरी भी करते हैं। गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। वन्य जीवों का हमेशा खतरा बना रहता है। हमें अन्यत्र बसाया जाए तो अच्छा होगा।
-सम्पत्ति बाई, ग्रामीण महिला

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