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5 जी युग में भी ऑफलाइन जी रहे ग्रामीण

दूरस्थ अंचलों में नहीं मिलती इंटरनेट कनेक्टिविटी, दक्षिण बैहर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित ग्रामों का मामला

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बालाघाट. 5 जी युग में भी ग्रामीण ऑफलाइन जी रहे हैं। ग्रामीणों के पास मोबाइल है, लेकिन वे संवाद नहीं कर पाते। संवाद करने के लिए उन्हें नेटवर्क तलाशना पड़ता है। जंगलों में बसे गांवों में नेटवर्क की समस्या है। इंटरनेट कनेक्टिविटी से ग्रामीण कोसो दूर हैं। आलम यह है कि वे देश-दुनिया की खबर से बेखबर रहते हैं। कवरेज एरिया में आने पर ही उन्हें सूचनाएं मिल पाती है। मामला जिले के दक्षिण बैहर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित और गढ़ी क्षेत्र के ग्रामों का है।
जानकारी के अनुसार दक्षिण बैहर और गढ़ी का अधिकांश क्षेत्र जंगलों के बीच बसा हुआ है। ऐसे में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। शहरी क्षेत्र से जुड़े हुए गांवों में ही बीएसएनएल और निजी कंपनी के मोबाइल का नेटवर्क मिलता है। जबकि जंगलों में बसे हुए गांवों में यह सुविधा शून्य है। जिसका लाभ ग्रामीण नहीं ले पा रहे हैं।
परेशान होते हैं ग्रामीण
पितकोना निवासी सुमरत, दड़ेकसा के पूर्व सरपंच चंदन उइके, सोनगुड्डा पूर्व सरपंच तातु सिंह धुर्वे, धुनधुनवार्धा सरपंच चैनसिंह पुसाम सहित अन्य ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं मिलने से ग्रामीण काफी परेशान होते हैं। न तो संवाद होता है और न ही देश-दुनिया की ताजा तरीन खबरें उन्हें समय पर मिल पाती है। इंटरनेट से जुड़े किसी भी प्रकार के कार्य नहीं होते हैं। यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
कुछेक क्षेत्रों में मिलता है बीएसएनएल का कवरेज
जिले के दक्षिण बैहर क्षेत्र में मुख्य मार्ग से लगे कुछेक गांवों में ही बीएसएनएल का कवरेज मिलता है। जंगलों में बसे गांव में न तो बीएसएनएल और न ही निजी कंपनी का नेटवर्क कार्य करता है। ऐसे क्षेत्रों में ग्रामीण मोबाइल का उपयोग तो करते हैं, लेकिन वे इसका उपयोग केवल संवाद के लिए करते हैं। जब ग्रामीणों को संवाद करना होता है तो वे कवरेज एरिया में आते हैं।
बैंकिंग सहित अन्य कार्यों के लिए करना पड़ता है सफर
दक्षिण बैहर और गढ़ी क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण कोई भी राष्ट्रीयकृत बैंक नहीं है। जिसके कारण ग्रामीणों को काफी परेशान होना पड़ता है। दक्षिण बैहर क्षेत्र के ग्रामीण बैंकिंग सहित इंटरनेट से जुड़े कार्यों के लिए उकवा, बैहर, मलाजखंड, बिरसा पर निर्भर हैं। ग्रामीण सप्ताह या पंद्रह दिन में एक बार आकर बैंकिंग का कार्य निपटाते हैं। जिसमें उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह गढ़ी क्षेत्र के ग्रामीण भी बैंकिंग कार्य के लिए उन्हें बैहर आना पड़ता है।
इन गांवों में बनी हुई समस्या
दक्षिण बैहर, लांजी, किरनापुर क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। खासतौर पर सोनगुड्डा, डाबरी, मोहनपुर, कावेली, पितकोना, चालीसबोड़ी, देवरबेली, चौरिया, कदला, बम्हनी, सुलसुली, सायर, संदूका, टेमनी, केराडीह, खमारडीह, बोदरा, आमानाला, नल्लेझरी, बरगुड, सतोना, चिलकोना, हर्राडीह, कोणपा, नरपी सहित ऐसे अनेक गांव हैं, जहां नेटवर्क की समस्या बनी हुई है।
कलेक्टर से चर्चा
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा के अनुसार दक्षिण बैहर क्षेत्र में सबसे ज्यादा नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। प्रशासन इसके लिए प्रयास कर रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। ताकि ग्रामीणों को परेशानी न हो। इसी तरह गढ़ी क्षेत्र की समस्या को भी सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। गढ़ी में शीघ्र ही राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोली जाएगी। इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है। प्रस्ताव राज्य स्तर पर अटका हुआ है। स्वीकृति मिलते ही यह सुविधा प्रारंभ हो जाएगी।
विधायक से चर्चा
विधायक संजय उइके के अनुसार नेटवर्क की समस्या को सुलझाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। गढ़ी और बैहर क्षेत्र के कुछेक स्थानों पर बीएसएनएल सहित निजी कंपनियों का नेटवर्क मिल रहा है। शेष स्थानों के लिए प्रयास किए जा रहे है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बैहर और गढ़ी क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज लेकर आएंगे। इसी पैकेज से दोनों ही क्षेत्रों की अधिकांश समस्या का समाधान हो जाएगा।