
केवट ने भगवान राम के चरण पखारे तो राम ने निषाद राज को लगाया गले
बालाघाट. मप्र संस्कृति विभाग भोपाल ने मुख्यमंत्री की घोषणा के परिपालन में भक्त शिरोमणि भक्तिमति माता शबरी और निषादराज गुहा के चरित्रों पर नाट्य लीला तैयार करवाई, जिसके मूल निर्देशक गुरू निर्मलदास, गुरू प्रसन्नदास है। जिन्होंने क्रमश: भक्तिमति माता शबरी व निषादराज गुहा, उक्त दोनों नाट्य लीलाओं को प्रदेश के सभी विकासखंडों में समरसता के भाव को विस्तारित करने अन्य नाट्य दलों को प्रशिक्षित कर नाट्य लीला मंचित करने का आदेश प्रसारित किया है। जिसके परिणाम स्वरूप जिले में जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय नूतन कला निकेतन बालाघाट के स्व. जगन्नाथ प्रसाद जायसवाल स्मृति सभागार में माता शबरी व बैतुल से पधारे राकेश वरवड़े के निर्देशन में निषादराज गुहा की नाट्य लीला प्रस्तुत की गई।
भगवान राम के बाल्यकाल, वाल्मिकि आश्रम, वन भ्रमण और अपने बाल सखा के साथ बिताए बचपन के वे क्षण जिसमें भवगवान श्रीराम के प्राणों की रक्षा बालक निषाद ने हिंसक जीव शेर के साथ लड़ाई कर बचाई थी और दशरथ ने इस क्षण निषाद को अपना पांचवां पुत्र कहा था। भगवान श्रीराम ने वन गमन के अवसर पर अपने ह्नदय से निषाद को गले लगाकर भाई भरत जैसा विशुभित कर दिया। तो वहीं केवट की जि़द पर न झुकने वाले विष्णु भी राम अवतार में केवट के प्रेम के सम्मुख नत् मस्तक हो गए। ये सारे दृश्य जब निकेतन के मंच पर अवलोकित होने लगे तो दर्शक दीर्घा अभिभूत होकर अपलक मंच को निहारते रही। प्रत्येक पात्रों का अभिनय वाक्य संवाद शैली प्रतिकात्मक प्रयोगात्मक शैलियों से युक्त नाट्य लीला अदृश्य वस्तुओं को भी भावनात्मक रूप से दर्शकों को अवलोकित करने का अवसर प्रदान किया।
Published on:
10 May 2022 10:15 pm
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