
जिले में मानव अधिकार आयोग मित्र के रूप में 27 वर्षो से काम कर रहीं फिरोजा खान
महिला सुरक्षा, जागरूकता और सशक्तिकरण पर लंबे समय से काम कर रहीं जिले की मानव अधिकार आयोग मित्र फिरोज खान आज नारीशक्ति की मिशाल बनी हुईं हैं। स्व के बलबूते वे मानव अधिकारों की सुरक्षा, महिलाओं के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और वूमन ट्रैफिकिंग जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर लंबे समय काम कर रहीं हैं। इनके इन्हीं कार्यों को लेकर वे देश विदेश में कई बार सम्मानित भी हो चुकी है।
फिरोजा खान पिछले 25 वर्षों से यूनेस्को से भी जुड़ी हुईं हैं। राष्ट्रीय एवं अंतर राष्ट्रीय स्तर पर अनेक कार्यक्रमों में सहभागिता कर चुकी हैं। उन्होंने शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, विश्व धरोहर संरक्षण, मानवाधिकार और सतत विकास जैसे विषयों पर आयोजित कार्यशालाओं और सम्मेलनों में सक्रिय प्रतिनिधित्व किया है।
श्रीमती खान ने बताया कि सन 1997 में बालाघाट के एमएलबी स्कूल से उनका दिल्ली परेड ग्राउंड के लिए चयन किया गया था। उन्होंने स्कूल की ओर से दिल्ली पहुंचकर विभिन्न सामाजिक कार्यो में सहभागिता की। तभी से सामाजिक कार्यो में उनकी बढ़ी। पीजी कॉलेज से एमएससी करने के बाद उन्होंने जबलपुर से बीएड फिर ह्यूमन राइट्स में भी पीजी किया है। 20 से 25 साल निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्य किया। इस दौरान भी खासकर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक असमानता, लड़कियों की शिक्षा और जागरूकता पर काम करते आ रही है। शादी के बाद शिक्षित परिवार और हर तरह से सहयोग करने वाले पति की बदौलत वे यूनेस्को का सदस्य भी बनी हुई हैं।
खान ने बताया कि उनके उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए यूनाइटेड नेशन रिसोर्स सेंटर गुवाहाटी के डायरेक्टर डॉ अश्विनी शर्मा ने उन्हें मध्यप्रदेश का कोऑर्डिनेटर मनोनीत किया है। खान को अब तक अनेक राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से यूनेस्को से विशिष्ट सेवा सम्मान, महावीर इंटरनेशनल का सनशाइन इंटरनेशनल वूमन अवार्ड, शहीद अशफाक उल्ला राज्य स्तरीय अवार्ड पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हस्ते मिला प्रदान किया गया व पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए भी प्रदान किए गए थे। फखे मिल्लत अवार्ड पूर्व राज्यपाल बलराम जाखड़ के हस्ते, यूनेस्को पीस मैसेंजर अवार्ड और तेलंगाना काउंसिल का महिला शिरोमणि अवार्ड से सम्मानित हो चुकी हैं।
मानव अधिकार आयोग मित्र के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ ही फिरोजा खान लंबे समय से सामाजिक सेवा में सक्रिय हैं। उनके कार्यों ने जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश और देश को भी गौरवान्वित किया है। खान का कहना है की आज हम महिला सशक्तिकरण की अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन अब भी महिलाओं को समानता का अधिकार नहीं मिल पाया है, महिलाओ को कमजोर और पुरषों से कम आंका जाता है। समाज की इसी सोच को बदलना होगा। महिलाओं के बराबर का दर्जा और सम्मन मिले यहीं उनका ध्येय है।
पत्रिका से चर्चा में खान ने महिलाओं के लिए संदेश भी दिया। बकौल फिरोजा खान- भारतीय समाज में आज भी परिवार के प्रति समर्पण को अच्छे संस्कार में गिना जाता है। महिलाओं में पारिवारिक मूल्यों जैसे सम्मान, प्रेम, आदर, सहयोग का होना आवश्यक है। घर परिवार में अच्छे संस्कार होना बहुत आवश्यक है।
Published on:
22 Sept 2025 04:30 pm
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