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धान की मिसाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

हार्वेस्टर, थ्रेसर से करवा रहे मिसाई का कार्य

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धान की मिसाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

धान की मिसाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

बालाघाट. गांव में अधिकतर किसान अपनी धान की फसल की कटाई और मिसाई का कार्य कर रहे हैं। लेकिन कृषि कार्य के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। जिसके कारण किसानों को अब मशीन का सहारा ले पड़ रहा है। क्षेत्र में अधिकांश किसान धान की मिसाई कार्य के लिए हार्वेस्टर और थ्रेसर मशीन का उपयोग कर रहे हैं। मजदूरों की कमी के चलते पारंपरिक पद्धति को छोड़ किसान आधुनिक तकनीकी को तेजी से अपना रहे हैं। किसान अधिकतर अपनी खेती की फसल को हार्वेस्टर मशीन से कटाई और मिसाई कर रहे हैं। वहीं थ्रेसर मशीन से सिर्फ मिसाई का कार्य तेजी से कर रहे है।
मजदूरों की कमी के चलते आज के समय पर पारंपरिक पद्वति से धन की मिसाई करना मुश्किल हो रहा है। एक तो मजदूर मिलते नहीं है और मिल भी गए तो उनके नखरे अलग। इस पद्धति में समय भी ज्यादा लगता है और मजदूरी भी ज्यादा लगती है। पारंपरिक पद्वति से धान मिसाई के कार्य में करीब चार से पांच घंटे का समय लगता है। जबकि मशीन द्वारा घंटों का कार्य मिनटों में हो जाता है। गौरव बोपचे किसान ने बताया पारंपरिक खेती में 1 एकड़ पीछे लगभग 4500 रुपए का खर्च कटाई और मिसाई का आता है। इस लिहाज से आज के दौर में मशीन से कटाई और मिसाई करना सस्ता होता है। वहीं समय की भी बचत होती है। नरेंद्र पारधी किसान ने बताया हार्वेस्टर मशीन का उपयोग आज के समय में उचित है। इससे समय के साथ-साथ जल्दी से काम समाप्त हो जाता है। उन्होंने अपने खेत में हार्वेस्टर द्वारा कटाई और मिसाई का कार्य संपन्न किया है। इसी तरह रुपचंद हनवत, सुरेश पारधी, नुपचंद सोनी, रूपेश भगत जैसे अनेक किसान भी हार्वेस्टर मशीन के साथ-साथ थ्रेसर मशीन का भी उपयोग अपनी फसल की कटाई और मिसाई में कर रहे हैं। अधिकतर किसानों का कहना है मजदूरों की कमी के चलते आज के इस दौर में आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल फायदेमंद और सुविधाजनक है। इस तकनीक से कम लागत में काम हो जाता है। वहीं समय की बचत भी होती है। धीरे-धीरे इसका उपयोग तेजी से बढ़ते जा रहा है।
मुकेश गौतम हार्वेस्टर मशीन मालिक ने बताया हार्वेस्टर मशीन एक ऐसी तकनीक है, जिससे किसान कम समय में कम लागत में खेत की खड़ी फसल को काट भी सकता है और साथ ही साथ मिसाई भी की जाती है। इस मशीन में 2000 रुपए प्रति एकड़ कटाई और मिसाई करने का खर्च आता है। जो पारंपरिक तकनीक से आधे से भी कम है। इसलिए अधिकतर किसान अब इन मशीनों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। राजू पारधी थ्रेसर मशीन मालिक ने बताया इस मशीन द्वारा सिर्फ मिसाई ही की जाती है। इसमें प्रति एकड़ 1000 रुपए का खर्च आता है। इस तकनीक में किसान कटाई कर अपने सुविधा अनुसार मिसाई करता है।