
शहीद राजेश यादव की माता
बलिया. जम्मू कश्मीर के उरी में हुए आतंकवादी हमले को एक साल हो गए। जिसमें शहीद हुए जवानों में बलिया जिले के एक लाल राजेश कुमार यादव भी शहीद हुए थे। शहीद का घर बलिया शहर से दस किलोमीटर पूरब में स्थित दुबहड़ गांव में है, जहां आज भी सबके दिलों में शहीद राजेश कुमार यादव अमर हैं। शहीद के परिजनों का कहना है कि पाकिस्तान से लड़ाई बॉर्डर पर नहीं बल्कि इस्लामाबाद पहुंचकर लड़नी चाहिए तब कहीं जाकर पाकिस्तान सुधरेगा।
शहीद के अंदर था भारत माता की रक्षा करने का जज्बा
शहीद राजेश कुमार यादव के छोटे भाई ने बताया कि देश की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले मेरे भाई देश के लिए कभी अपने जान की परवाह नहीं की। शहीद राजेश यादव के बहादुरी का परिचय देते हुए बताया कि जम्मू कश्मीर में पोस्टिंग के दौरान भी उन्हें एक बार गोली लगी थी और वह पहाड़ से नीचे गिर गए थे। लेकिन उसके बाद भी शहीद के दिल में सिर्फ और सिर्फ भारत माता की रक्षा करने का ही जज्बा था।
आज भी शहीद बेटे के इंतजार में नजरें बिछाए बैठी हैं बूढ़ी आंखें
जम्मू कश्मीर के उरी हमले में 18 सितम्बर 2016 को वीर सपूत लांसनायक राजेश कुमार यादव शहीद हुये थे। अपने बहादुर बेटे को खो चुकी शहीद के मां की बूढ़ी आखों को आज भी अपने बेटे के आने का इंतज़ार है । शहीद राजेश की मां बताती है कि उरी हमले के कुछ दिन पहले ही उनकी बात हुई थी तब शहीद राजेश ने सिर्फ इतना बताया था की वो ऊंचे पहाड़ों पर जा रहे हैं और जल्द ही लौटेंगे । शायद इन्हीं बातों को याद करके आज भी शहीद के दरवाजों की हल्की आहट भर से अपने लाडले को देखने दौड़ पड़ती है।
मेरे शहीद पति की बातों पर आज भी गर्व महसूस करती हूं
शहीद राजेश की पत्नी अपने वीर पति की यादों को दिल में संजोए तीन बेटियों के साथ उन पलों को याद करती हैं । जब राजेश कहते थे कि आर्मी मेरे लिए है और मैं आर्मी के लिए। पत्नी का कहना है कि मैं आज भी अपने पति के इस बात पर गर्व महसूस करती हूं। शहीद की पत्नी का कहना है कि उनके पति को देश से अथाह प्रेम था लिहाज़ा देश के बाद ही उनके लिए परिवार था। पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर कहा कि उसका इलाज युद्ध है ।
Published on:
28 Sept 2017 01:25 pm
बड़ी खबरें
View Allबलिया
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
