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Good News: बलिया के किसानों का जागा भाग्य, सीएम योगी ने ‘चने के सत्तू’ को लेकर कर दी बड़ी घोषणा!

Good News: यूपी में उपचुनाव से पहले योगी सरकार ने बलिया जिले को बड़ा गिफ्ट दिया है। इसके तहत जिले में चने की खेती करने वाले किसानों को बड़ा फायदा होगा। आइए जानते हैं।

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Good News: उपचुनाव से पहले योगी सरकार ने दिया बड़ा गिफ्ट, इस योजना से लखपति बनेंगे बलिया के किसान

Good News: उपचुनाव से पहले योगी सरकार ने दिया बड़ा गिफ्ट, इस योजना से लखपति बनेंगे बलिया के किसान

Good News: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिली करारी हार के बाद योगी सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है। भाजपा और योगी सरकार की मंशा है कि विधानसभा उपचुनाव में लोकसभा जैसा हाल न हो। इसके लिए भाजपा पूरी रणनीति के साथ फील्‍ड में उतर चुकी है। इसी के तहत सीएम योगी खुद पूरी टीम के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों में दौरा कर रहे हैं।

इस दौरान वह जिलों में करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के सहारे लोगों का मन भी टटोल रहे हैं। इसी कड़ी में बलिया के मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज की पहल पर योगी सरकार ने बलिया जिले को बड़ा गिफ्ट दिया है। इसके तहत बाटी-चोखा के नाम पर प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखने वाले बलिया के सत्तू को ओडीओपी यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की सूची में शामिल करने की तैयारी है। योगी सरकार ने इसके लिए सर्वे करने का आदेश दिया है।

बलिया के बाटी चोखा की पूरे प्रदेश में अलग है पहचान

दरअसल, बलिया के बाटी-चोखा की पूरे प्रदेश में अलग पहचान है। इसी बाटी चोखा में पड़ने वाले सत्तू को अब योगी सरकार बलिया के ओडीओपी उत्पाद के नाम पर पहचान दिलाएगी। इसके लिए प्रमुख सचिव सूक्ष्म एवं लघु उद्योग ने जल्द ही जिले में सर्वे टीम भेजने का आश्वासन दिया है। सर्वे टीम किसानों के बीच जाकर जिले में चने की उत्पादकता का आकलन करेगी।

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इसके बाद किसानों को देसी चने का उत्पादन बढ़ाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। बलिया के मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने बताया कि उन्होंने सत्तू को बलिया के ओडीओपी उत्पाद में शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा ‌था। इसपर प्रमुख सचिव लघु एवं सूक्ष्म उद्योग ने इसपर हामी भरते हुए जिले में जल्द ही सर्वे टीम भेजने का आश्वासन दिया है।

मध्य प्रदेश से बलिया में अभी आता है चना

बलिया के मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने बताया कि बलिया में खेती का दायरा अभी बेहद कम है। इसके चलते व्यापारी मध्य प्रदेश से चना लाकर उसका सत्तू तैयार करते हैं। इसमें बलिया के देसी चने का स्वाद नहीं मिलता। जबकि बलिया का बाटी चोखा पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखता है।

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उन्होंने बताया कि अब जिले में किसानों को चने की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। सर्वे टीम आकर चने की खेती के दायरे की जांच करेगी। इससे पहले प्रशासन ने सत्तू को ओडीओपी में शामिल कराने के लिए अपने स्तर पर हर संभव प्रयास शुरू कर दिया है। चने की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

बलिया में चने की खेती का रकबा बढ़ाने में जुटा प्रशासन

मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने बताया कि अभी बलिया में 3478 हेक्टेयर में चने की खेती होती है। अब ओडीओपी उत्पाद में सत्तू को शामिल कराने के लिए इसका रकबा बढ़ाया जाएगा। प्रशासन ने बलिया में इस बाद 10 हजार हेक्टेयर में चने की खेती का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को चने का बीच मुफ्त उपलब्‍ध कराया जाएगा। अब प्रशासन का पूरा फोकस चने की खेती को बढ़ावा देने पर है।

किसानों को क्या होगा फायदा?

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि एक हेक्टेयर में 25-30 कुंतल चना उत्पादन होता है। इसमें लगभग 30-40 हजार रुपये खर्च आता है। जिले में सात समूहों के पास चना भूनने की मशीन है। इसी मशीन पर चने को पीसा भी जा सकता है। एक किलो चने में साढ़े सात सौ ग्राम सत्तू निकलता है। इस सत्तू की कीमत बाजार में 115 से 125 रुपये प्रति किलो है। ऐसे में किसानों को मात्र चार महीने में ही प्रति हेक्टेयर तीन लाख से अधिक का लाभ होगा। यानी किसान प्रति हेक्टेयर तीन लाख रुपये से ज्यादा का चना बेच सकेंगे। यह उत्पाद ओडीओपी में शामिल होने से जिले में कई छोटे-छोटे उद्योग की स्‍थापित होंगे। इससे रोजगार भी बढ़ेगा।

शुरुआती दौर में 10 बड़े किसानों को उपलब्‍ध कराया जाएगा बीज

बलिया के मुख्‍य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने बताया "चने के सत्तू को ओडीओपी में शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रमुख सचिव लघु एवं सूक्ष्म उद्योग ने इसका अनुमोदन करते हुए जिले में जल्द ही सर्वे टीम भेजने की बात कही है। यह टीम जिले में चने के उत्पादन की जांच करने के साथ ही किसानों को चने की खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूक करेगी। अभी फिलहाल 10 बड़े किसान चने का रकबा बढ़ाने की तैयारी में जुटे हैं। चने का सत्तू ओडीओपी में शामिल होगा तो कई लोगों को रोजगार भी मिलेगा।"