
नारद राय
बलिया. सपा पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी में आए दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री नारद राय ने बसपा छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मैं इस पार्टी में घुटन महसूस कर रहा था। कहा कि आज से मेरा इस पार्टी से कोई रिश्ता नहीं है। मैं अब स्वतंत्रता के साथ जनता के संघर्षों की लड़ाई लड़ सकता हूं। अभी तक उन्होंने किसी पार्टी में शामिल होने का ऐलान नहीं किया है।
बतादें कि नारद राय ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि बसपा की समीक्षा बैठक में मैंने बसपा प्रमुख मायावती जी से आग्रह किया था कि आप के कार्यकर्ता ईमानदार हैं और सिंबल को देखकर वह मतदान कर रहे हैं, लेकिन आपके कोऑर्डिनेटर की छवि खराब है उनका आचरण राजनीतिक नहीं है। वे एक प्राइवेट कंपनी की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने इसे सुधार करने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन दूसरी बैठक में पुरानी व्यवस्था को ही उन्होंने कायम रखा ।
श्री राय ने कहा कि मायावती के कोऑर्डीनेटर और बसपा की कार्यशैली की वजह से मैं इस पार्टी में घुटन सा महसूस कर रहा था। बसपा छोड़कर अब मैं खुद को स्वतंत्र महसूस कर रहा हूं। अब इस पार्टी से मेरा किसी प्रकार का कोई रिश्ता नहीं है। आज से जनता के संघर्ष लिए मैं स्वतंत्र हूं । श्री राय ने कहा कि यह निर्णय भी कार्यकर्ताओं की राय से होगा फिलहाल मैं भाजपा ज्वाइन करने वाला नही हूं।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था नारद राय का करियर
नारद राय ने अपना करियर छात्र राजनीति से शुरूआत किया था। वे पहली बार 1985 में लोक दल से चुनाव लड़े थे। उसके बाद सपा के टिकट पर बलिया सदर से चुनाव जीतने के बाद नगर विकास राज्य मंत्री बने। उसके बाद दूसरे चुनाव मे हार का मुंह देखना पड़ा। फिर सपा ने पूर्व मंत्री पर विश्वास जताते हुए नारद राय को चुनाव में उतारा।
सपा के ही टिकट से जीतते हुए मंत्री पद पर सुशोभित हुए। नारद राय को सपा कि ही सरकार ने खेल मंत्री,खादी ग्राम उद्योग, व विज्ञान व प्रधोगिग जैसे मंत्रालय का भार सभाला फिर पिछले चुनाव में सपा से लाख कोशिशों के बावजूद टिकट न मिलने पर बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और बसपा के ही टिकट से बलिया सदर चुनाव लडे और हार का सामना करना पड़ा।
Published on:
03 Oct 2017 12:21 pm
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