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छत्तीसगढ़ का एक मात्र सती स्तंभ बन गया कूड़ादान, 14-15 वीं शताब्दी के धरोहर की बदहाली

प्रस्तर निर्मित चबूतरे पर अंजलिबद्ध मुद्रा में बैठी हुई सती नारी की आकृतियुक्त एक सती स्तंभ गड़ा हुआ है। एक अलंकृत किंतु खंडित द्वार शाखा भी है। इस चबूतरे के सामने खंडित स्थापत्य खंड फैले हुए है।

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बालोद

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Dakshi Sahu

Oct 15, 2018

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छत्तीसगढ़ का एक मात्र सती स्तंभ बन गया कूड़ादान, 14-15 वीं शताब्दी के धरोहर की बदहाली

बालोद/डौंडीलोहारा. शासकीय भर्राशायी व उपेक्षापूर्ण कार्यप्रणाली का जीवंत उदाहरण देखना हो, तो जिले के डौंडीलोहारा में देखा जा सकता है। राज्य संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की खानापूर्ति कार्यप्रणाली के कारण हमारे ऐतिहासिक धरोहर व गौरवशाली इतिहास टिकरापारा स्थित प्राचीन मडिय़ापाट मंदिर व प्राचीन स्मारक कूड़ेदान बन गया है।

एक ओर जहां विदेशों में अपनी पुरातन संस्कृति व स्मारकों को सहेजने लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं वहीं यहां ऐसे स्थलों को विभाग राज्य संरक्षित स्मारक घोषित करने के बाद उस ओर मुड़कर भी नहीं देखते। प्राचीन स्थल मेंंतब्दील होते जा रहे हैं। पुरातत्व जानकारों की मानें तो यह क्षेत्र पहले कवर्धा के फनीनागवंशीय शासकों का प्रभाव क्षेत्र रहा है।

मामले में संस्कृति विभाग में पूर्व में पदस्थ रह चुके रमेश शर्मा ने बताया बालोद जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों पलारी, कपिलेश्वर महादेव, कुकुर देउर मंदिर आदि जगहों पर इन स्थलों की देखरेख के लिए केयर टेकर विभाग द्वारा नियुक्त किए गए हैं। इसका पूरा संचालन महंत घासीदास संग्रहालय रायपुर से किया जाता है।

डौंडीलोहारा में मीले व राज्य संरक्षित स्मारक पुरातत्व स्थलों की उपेक्षा अधिकारियों पर ग्रामीण जीवराखान कौमार्य, जगदीश कौमार्य, अशोक बारले, विष्णु बारले, मनीराम बघेल, मोहन बघेल, छन्नू बारले, शुक्ला राम तांडेकर आदि ने संरक्षण व व्यवस्थित करने की मांग की है।

ये है मडिय़ापाट मंदिर की विशेषता
यह ध्वस्त मंदिर लोहारा तहसील में कांकेर-राजनांदगांव रोड पर बालोद से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गांव के बीच में प्रस्तर निर्मित चबूतरे पर अंजलिबद्ध मुद्रा में बैठी हुई सती नारी की आकृतियुक्त एक सती स्तंभ गड़ा हुआ है। एक अलंकृत किंतु खंडित द्वार शाखा भी है। इस चबूतरे के सामने खंडित स्थापत्य खंड फैले हुए है।

यह पूर्ण रूपेण ध्वस्त हो चुका है। एक अनुमान के मुताबिक यह मंदिर लगभग 14-15 वीं शताब्दी में निर्मित होना बताया जाता है। सीएमओ नगर पंचायत डौंडीलोहारा तरूण पाल लहरे ने बताया कि प्राचीन स्मारकों से संबंधित सारी कार्रवाई संस्कृति व पुरातत्व विभाग द्वारा ही कि जाती है। नगर पंचायत द्वारा साफ -सफाई करवाने का कार्य करवाया जाएगा।