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दो साल से दो तहसील का प्रभार एक तहसीलदार पर, मुसीबत 122 गांवों के लोगों की

यह दुर्भाग्य है कि तहसील में लंबे समय बाद भी अब तक कोई स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिसके कारण गुरुर तहसील कार्यालय में लोगों को दिनभर इधर-उधर भटकते देखा जा सकता है।

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Satya Narayan Shukla

Dec 26, 2016

Balod : An officer for two years on charges of two

Balod : An officer for two years on charges of two district, 122 villages of trouble

बालोद/गुरुर.यह दुर्भाग्य है कि तहसील में लंबे समय बाद भी अब तक कोई स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिसके कारण गुरुर तहसील कार्यालय में प्रतिदिन अपनी जमीनों के अनेक मामले लेकर आने वाले लोगों को दिनभर इधर-उधर भटकते देखा जा सकता है। इसी वजह से तहसील के 122 गांवों के ग्रामीणों को नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, बंटवारा जैसे छोटे-छोटे अन्य कामों में बाधा उत्पन्न हो रही है। लोग दफ्तरों का चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो गए हैं।

मनमर्जी से आते हैं कर्मचारी
यहां दूसरी परेशानी ये है कि तहसीलदार नहीं होने से कार्यालय में पदस्थ अन्य कर्मचारी भी अपनी मनमर्जी से आते-जाते हैं जिसके कारण छोटे-छोटे कार्यों के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है। भुईयां कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के किसानों को बी वन खसरा, पांच शाला नक्शा का नकल, लोक सेवा केन्द्र में स्कूली बच्चों को भी आय, जाति, स्थायी निवास, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य प्रमाण पत्रों के लिए भटकना पड़ रहा है। इसी वजह से तहसील में समय पर कार्य नहीं होता और लोगों को 10 से 15 दिन तक तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है।

कार्यालय में सैकड़ों प्रकरण हैं यहां लंबित
मामले में जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष सुरेन्द्र तिवारी का कहना है, तहसील में नामातंरण, खाता विभाजन सहित अन्य कार्यों के सैकड़ों प्रकरण लंबित है, इस संबध में जनदर्शन, समस्या निवारण शिविर में शिकायत की जा चुकी है लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ज्ञात हो कि तत्कालीन तहसीलदार डीआर मरकाम का 3 मार्च को स्थानांतरण के बाद क्रमश: आरपी आंचला व बीआर साहू को प्रभार दिया गया था, जिसका एक माह बाद प्रमोशन हो गया जिससे जिला मुख्यालय के तहसीलदार एआर राणा प्रभार पर हैं, लेकिन राणा का मूल कार्यालय बालोद में ही होने के कारण गुरुर तहसील का हाल बेहाल है।

पेयजल के लिए तहसील के बाहर दुकानों पर निर्भर
गुरुर तहसील भौगोलिक दृष्टिकोण से बड़ा क्षेत्र होने के कारण प्रतिदिन यहां सैकड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहता है। यहां लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। धूप, बरसात से बचने शेड नहीं है, सार्वजनिक प्रसाधन नहीं होने से पक्षकारों को खुले में जाना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या महिला पक्षकारों को होती है। यहंा का एक मात्र ट्यूबवेल 4 दिनों से बंद पड़ा हुआ है। जिसके कारण लोगो को पानी पीने के लिए तहसील के बाहर दुकानों या घरों मे जाना पड़ता है, रोज-रोज की यह दिनचर्या को देखते हुए दुकानदार भी पानी देने से मना कर देते है। जिसके कारण लोगो को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

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