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लौह नगरी में दो घरों में खिले ब्रह्मकमल के फूल, इसकी पौराणिक मान्यता भी

लौह नगरी दल्लीराजहरा में बीएसपी के दल्ली माइंस टाइम ऑफिस में कार्यरत बीएसपी कर्मचारी हेमंत देवहारी के क्वॉर्टर 11 ए थ्री ए टाइप हॉस्पिटल सेक्टर में रात्रि 10 बजे के समीप ब्रह्म कमल के तीन फूल खिले। इसी रात पंडरदल्ली निवासी शीतल मनमोड़े के घर में भी ब्रह्मकमल के फूल खिले।

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औषधीय महत्व का है यह फूल

ब्रह्मकमल

बालोद/दल्लीराजहरा. लौह नगरी दल्लीराजहरा में बीएसपी के दल्ली माइंस टाइम ऑफिस में कार्यरत बीएसपी कर्मचारी हेमंत देवहारी के क्वॉर्टर 11 ए थ्री ए टाइप हॉस्पिटल सेक्टर में रात्रि 10 बजे के समीप ब्रह्म कमल के तीन फूल खिले। इसी रात पंडरदल्ली निवासी शीतल मनमोड़े के घर में भी ब्रह्मकमल के फूल खिले। धार्मिक महत्व का यह फूल हिंदू धर्म के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और दुर्लभ फूलों में गिना जाता है। हिंदू पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रह्मकमल वही पुष्प जिस पर भगवान शंकर ने जल छिड़ककर भगवान गणेश को जीवित किया था।

जीवन देने वाला फूल
इस फूल को जीवन देने वाला फूल भी माना जाता है। यह रात्रि 10 से 11 के बीच खिलता है। मध्यरात्रि के बाद सिकुडऩा चालू हो जाता है तथा सुबह होते होते पूरी तरह से मुरझा जाता है। यह अत्यंत सुंदर चमकते सितारों जैसा आकार लिए मादक सुगंध वाला पुष्प है। इसे हिमालय के फूलों का सम्राट भी कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्म कमल औषधि गुण वाला पौधा है। इसकी पंखुड़ी से अमृत की बूंदें टपकती हैं। इससे निकलने वाले पानी को पीने से शरीर की थकान मिट जाती है। इससे पुरानी खांसी (काला), कैंसर सहित कई खतरनाक बीमारियों का इलाज होता है।

यह तालाब नहीं बल्कि जमीन में खिलने वाला कमल
यह तालाब नहीं बल्कि जमीन में खिलने वाला कमल है। ब्रह्मकमल का वैज्ञानिक नाम ससोरिया ओरबिलट है। संयंत्र कर्मी हेमंत देवहरे ने बताया कि यह कमल का फूल उनकी पत्नी इंदू देवहारी ने बाजार से लाकर 2 वर्ष पूर्व गमले में लगाया था। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी बागवानी का शौक रखती है तथा दल्लीराजहरा के सप्तगिरी पार्क में होने वाले पुष्प प्रदर्शनी में भी हिस्सा लेती है। वहां उन्हें बहुत से पुरस्कार मिल चुके हैं।

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