
अनोखा सरकारी स्कूल, यहां डाइनिंग टेबल पर मध्यान्ह भोजन करते हैं बच्चे, होमवर्क पूरा करने वाला बैठता है सोफे पर,अनोखा सरकारी स्कूल, यहां डाइनिंग टेबल पर मध्यान्ह भोजन करते हैं बच्चे, होमवर्क पूरा करने वाला बैठता है सोफे पर,अनोखा सरकारी स्कूल, यहां डाइनिंग टेबल पर मध्यान्ह भोजन करते हैं बच्चे, होमवर्क पूरा करने वाला बैठता है सोफे पर
बालोद. जिला मुख्यालय के कुंदरूपारा में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला (CG Government school) स्कूल इन दिनों नवाचार के लिए जिले में पहचाने जाने लगा है। यहां बच्चे डाइनिंग टेबल पर बैठकर मध्यान्ह भोजन (Mid day meal in Balod) करते हैं। वहीं होमवर्क पूरा करने वाले को सोफे पर बैठकर पढऩे का मौका दिया जाता है। सरकारी स्कूल के प्रभारी प्रधान पाठक व स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं की इस अनोखी पहल को देखकर शिक्षा विभाग के आला अधिकारी भी इस स्कूल की सराहना करते नहीं थकते। विद्यालय में बनाए गए किचन गार्डन से जैविक कृषि से शाक सब्जी पैदावार कर मध्यान्ह भोजन में भी उपयोग किया जा रहा है।
यहां बच्चों का अपना गुल्लक बैंक
जिला मुख्यालय के इस सरकारी स्कूल में कुल 40 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों का खुद का गुल्लक बैंक है। यह योजना कक्षा चौथी व पांचवीं के लिए बनाई गई है। जब बच्चे कक्षा पहली में प्रवेश कर एवं उत्तीर्ण कर चौथी क्लास में जाते है तो सभी बच्चों को गुल्लक दिया जाता है। इस गुल्लक में रंग रोगन का विद्यार्थियों के नाम लिखे हुए हैं। प्रभारी प्रधान पाठक केशव प्रसाद बंजारे ने बताया कि यह योजना बच्चों के लिए है। इसमें बच्चे चौथी व पांचवीं तक रुपए डालते हैं। जैसे ही कक्षा पांचवी पास होकर छठवीं में जाने टीसी लेने आते है तो टीसी के साथ दो साल तक गुल्लक में जमा राशि भी दे दी जाती है। इस राशि से बच्चे आगे की पढ़ाई में उपयोग करते है।
होमवर्क करने वाले बच्चों के लिए सोफा की सुविधा
यहां पढ़ाई भी रोचक तरीके से कराई जाती है। शिक्षक द्वारा दिए गए सवालों व होमवर्क को छात्र पूरा करते हैं उसे सोफे में बैठाकर पढ़ाई कराई जाती है। इस पहल से बच्चों में होमवर्क पूरा कर स्कूल आने की ललक बढ़ती है। इस पहल से बच्चे भी रोजाना होमवर्क व दिए गए काम को पूरा कर लेते हैं। इससे स्कूल की पढ़ाई का स्तर भी सुधर रहा है। यहां कबाड़ से जुगाड़ कर सोफा बनाया गया है।
जिले के अधिकतर स्कूलों में बच्चों के जन्म दिन पर बैलून सजा कर केक और चॉकलेट बांटकर मनाया जाता है। इस स्कूल में बच्चों को जन्मदिन पर शाला विकास समिति की ओर से प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। जिसे बच्चे यादगार के रूप में अपने घरों में रखते है। इस स्कूल की शिक्षा प्रणाली जिले के लिए रोल मॉडल बन गई है।
Published on:
20 Jan 2020 03:46 pm
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