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बालोद 2021 में हुआ नक्सल मुक्त, अब लाल पानी से चाहिए मुक्ति

प्रदेश को नक्सल मुक्त करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। बस्तर को नक्सल मुक्त करने की डेडलाइन भी 31 मार्च को समाप्त हो गई। बस्तर को नक्सल मुक्त करने में देश व प्रदेश के कई जवान भी शहीद हुए हैं। एक समय था जब बालोद जिले ने भी नक्सली […]

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नक्सल मुक्त जिला घोषित होने के बाद भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इसमें दल्लीराजहरा का लालपानी प्रभावित क्षेत्र है। लाल पानी से मुक्ति दिलाने की मांग क्षेत्र के लोग लग लगातार कर रहे हैं, लेकिन दल्लीराजहरा से लगे क्षेत्र को लाल पानी से मुक्ति नहीं मिली।

प्रदेश को नक्सल मुक्त करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। बस्तर को नक्सल मुक्त करने की डेडलाइन भी 31 मार्च को समाप्त हो गई। बस्तर को नक्सल मुक्त करने में देश व प्रदेश के कई जवान भी शहीद हुए हैं। एक समय था जब बालोद जिले ने भी नक्सली वारदात का दंश झेला। पुलिस की सक्रियता से बढ़ते दबाव के कारण नक्सली बालोद जिले की सीमा पर कदम नहीं रखते थे। यही वजह है बालोद को 2021 में नक्सल मुक्त जिला घोषित किया गया। जिले में साल 2008 से 2021 तक नक्सली हमले व वारदात के 14 मामले सामने आए थे। इसमें माइंस को लूटने व नलकसा के ग्रामीण की हत्या का मामला शामिल है।

अब विकास व लाल पानी से मुक्ति की चल रही लड़ाई

नक्सल मुक्त जिला घोषित होने के बाद भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इसमें दल्लीराजहरा का लालपानी प्रभावित क्षेत्र है। लाल पानी से मुक्ति दिलाने की मांग क्षेत्र के लोग लग लगातार कर रहे हैं, लेकिन दल्लीराजहरा से लगे क्षेत्र को लाल पानी से मुक्ति नहीं मिली। आज भी दल्लीराजहरा के महामाया क्षेत्र से लगे कुछ गांव लाल पानी से प्रभावित है। हालांकि प्रशासन दावा जरूर करता है कि विकास हो रहा है। अभी भी यहां विकास की दरकरार है।

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ग्रामीण करते हैं रोजगार व विकास के लिए प्रदर्शन

इस क्षेत्र के आड़ेझर, महामाया, कोपेडेरा, कटरेल सहित अन्य गांव हैं, जहां के लोग लाल पानी से प्रभावित हैं। किसान मनोज, रणजीत सिंह ने बताया कि कुमुड़कट्टा और कोपेडेरा सहित आसपास के क्षेत्र के खेत को माइंस का लाल पानी लाल कर देता है। जमीन पर धान या अन्य फसलों की खेती जरूर करते हैं, लेकिन उत्पादन ही नहीं होता। लाल पानी से राहत दिलाने की मांग को लेकर कई बार चक्काजाम, प्रदर्शन किया गया। सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा।

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बालोद जिले में हुई नक्सल घटनाएं

2 मार्च 2008 को जिले के महामाया माइंस में 1750 किलो बारूद वाहन से ले जा रहे थे। 25 से 30 वर्दीधारी महिला-पुरुष नक्सलियों ने सीआईएसएफ जवानों के सामने बंदूक तानकर बारूद लूटकर ले गए थे।
8 जून 2008 को 25 से 30 वर्दीधारी नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के जवान पेट्रोलिंग कर लौट रहे थे। उनके वाहन को जिले के महामाया मार्ग आड़ेझर के पास विस्फोट से उड़ा दिया।
साल 2010 में 23-24 दिसंबर की रात्रि को 20 से 25 वर्दीधारी नक्सलियों ने महामाया थाना अंतर्गत ग्राम नलकसा के 46 वर्षीय राम भरोसा दुग्गा की हत्या कर दी थी।
10 सितंबर 2017 को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सभा के एक दिन पहले ही नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने बम्हनी के पास जंगल मार्ग में 2 लीटर प्रेशर कुकर बम लगाया था, जिसे सुरक्षा बलों ने डिस्पोज किया था।

नक्सलियों को सामान सप्लाई करने वाला पकड़ाया था

पुलिस ने 6 जून 2020 को गुंडरदेही निवासी हरिशंकर गेडाम को सुकमा मलकानगिरी चौंक से घेराबंदी कर पकड़ा गया था। कब्जे से 395 राउंड कारतूस 303 व एके 47 एसएलआर हथियारों के कारतूस मिले थे। आरोपी हरिशंकर गेडाम नक्सलियों को कई बार वर्दी, टोपी व अन्य जरूरी सामानों की भी सप्लाई की थी।

नक्सलमुक्त होने के बाद हो रहा विकास

बालोद पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने कहा कि बालोद जिले को साल 2021 में नक्सल मुक्त जिला घोषित किया गया। अभी पुष्टि नहीं हुई कि जिले में नक्सलियों की मौजूदगी है। पुलिस टीम सुरक्षा के तौर पर बालोद जिले से लगे कांकेर, राजनांदगांव सीमा क्षेत्र के जंगल में लगातार सर्चिंग कर रही है। नक्सल मुक्त जिला बनने के बाद से क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है।