
स्कूली बच्चों के आंखों की स्थिति चिंताजनक
बालोद. जिले में नेत्र विभाग हर साल बाल नेत्र सुरक्षा अभियान चलाता है। अब 16 जून से स्कूल खुलने वाले हैं। नए शिक्षण सत्र पर जुलाई से फिर स्कूली बच्चों की आंखों की जांच की जाएगी। जिले में कुछ वर्षों से स्कूली बच्चों के आंखों की स्थिति चिंताजनक है। बच्चों की आंख जल्दी कमजोर हो रही है। जिला नेत्र विभाग के मुताबिक बीते साल विभाग ने कुल 425 सरकारी पूर्व माध्यमिक स्कूलों में लगभग 3,33,288 बच्चों की आंखों की जांच की थी। 1076 बच्चों में दृष्टि दोष पाया गया, जिन्हें चश्मा का वितरण किया गया।
मोबाइल और टीवी से नजर हो रही कमजोर
सहायक जिला नेत्र चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके सिन्हा ने बताया कि घरों में बच्चों को मोबाइल पर लगातार गेम खेलना, मोबाइल देखना व लगातार टेलीविजन देखने की वजह से बचपन में ही नजर कमजोर हो रही है।
साल 2022-23 में बच्चों में नेत्र जांच की स्थिति
कुल स्कूल जांच माध्यमिक शाला - 425
छात्र-छात्राएं - 333288
दृष्टि दोष - 1076
चश्मा वितरण - 1076
बच्चों को मोबाइल और टीवी का आदी न बनाएं
नेत्र विभाग के चिकित्सक अनिल कुमार सिन्हा ने बच्चों व पालकों से अपील भी की है कि छोटे बच्चों को ज्यादा मोबाइल व टेलीविजन का आदी न बनाएं। बच्चे मोबाइल व टेलीविजन के भी आदी हो गए हैं। यह बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है। बच्चों को भी सावधानी बरतनी होगी।
आंख कमजोर होने के ये लक्षण
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार सिन्हा ने बताया कि आंखों में नजर का विकास सात वर्ष की आयु तक होता है। इस दौरान कई बार नजर के बारे में बच्चा समझ नहीं पाता और जो दिखता है, उसे ही सही समझता है। इस कारण बच्चा आंखें बार-बार मसलता है, टीवी को दस फीट दूर होने के बाद पास जाकर देखने की कोशिश करता है, दूर देखने पर आंखें छोटी करने की कोशिश करता है तो समझ लेना चाहिए कि उसकी आंखें कमजोर है। समय पर चिकित्सक से उचित परामर्श नहीं लेने से आंखों में भैंगापन हो जाता है।
Published on:
11 Jun 2023 11:45 pm
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