
कंकालिन मंदिर में मनाया देव दशहरा
बालोद/गुरुर . ग्राम पेटेचुआ स्थित मां कंकालिन मंदिर में मंगलवार को देव दशहरा धूमधाम से मनाया गया। हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। मंदिर की परंपरा रही है कि क्वांर नवरात्रि प्रारंभ होने के बाद प्रथम मंगलवार को दशहरा उत्सव मनाया जाता है। इसमें 52 गांव के देवी देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। ब्लॉक मुख्यालय से 18 किमी दूर ग्राम पेटेचुआ में स्थित मां कंकालिन मैया मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर खारुन नदी का उद्गम स्थल है, जो चारों ओर जंगल से घिरा है, जो मन को मोहित करता है। पहले यह मंदिर खुले आसमान के नीचे था। बाद में मंदिर बनाया गया।
ऐसे प्रकट हुई मां कंकालिन, जो चुराती थीं महुआ
मां कंकालिन मैया की उत्पत्ति को लेकर मंदिर पुजारी रामकुमार कोमर्रा ने बताया कि 700 से 800 साल पहले ग्राम पेटेचुआ निवासी बुजुर्ग चिराम मंडावी गांव से दूर जंगल में महुआ बीनने जाते थे। महुआ बीनने के बाद चट्टानी जमीन होने के कारण उसी स्थान पर सुखाकर घर चले आते थे। अगले दिन उसी जगह पर पहुंचने पर सुखाया हुआ, महुआ गायब हो जाता था। यह सिलसिला लगातार चलता रहा। चिराम मंडावी मामले का पता लगाने रात में उसी स्थान पर रुक गया, जहां उसने महुआ सुखाया था। रात हुई तब महुआ अपने आप गायब हो गया। चिराम मंडावी ने आवाज देकर कहा कि कौन है, जिसने मेरे महुआ को गायब किया है सामने आओ। तब हवा स्वरूप माताजी ने कहा कि मैं कंकालिन हूं, लेकिन उसे यकीन नहीं हुआ और सामने आने की बात कही। तब जोरदार आवाज आई। मां कंकालिन धरती चीरकर स्वयं प्रकट हुई और बताया कि मैं ही तुम्हारा महुआ को गायब करती हूं। यह कहते हुए मां कंकालिन उसके शरीर में प्रवेश कर गई, जिससे वह मूर्छित हो गया। यह सिलसिला चलते-चलते सुबह हो गई। तब उसकी पत्नी उसे खोजने जंगल गई। उसे चिराम मूर्छित अवस्था में मिला। तब उसने घटना की जानकारी ग्रामीणों को दी। ग्रामीण उसे लेकर गांव आ गए। जहां उसे होश आया और उसने पूरी घटना ग्रामीणों को बताई। तब ग्रामीणों ने पत्थर तोड़कर प्रकट हुई मां की पूजा-अर्चना प्रारंभ की। तब से मां कंकालिन की पूजा-अर्चना की जा रही है।
देव दशहरा में उमड़ती है ग्रामीणों की भीड़
मंदिर में पितृमोक्ष के बाद प्रथम मंगलवार को देव दशहरा उत्सव मनाया जाता है, जो देश का पहला दशहरा है। इसमें हजारों श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं और मां से मुरादें मांगते हैं। मंदिर प्रांगण में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लग जाती है। देव दशहरा में आसपास के ग्रामीण बाजा-गाजा, डांग-डोरी लेकर पहुंचते हंै। कहते हैं, जो भी सच्चे दिल से मां से मनोकामना करता है, उसे वह पूरा करती हैं।
देश की पहली होली भी यहीं मनाई जाती है
कंकालिन मंदिर में देश का प्रथम देव दशहरा मनाने के साथ ही सबसे पहले होलिका दहन भी होता है, जो फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को माताजी का फाग होता है।
Published on:
17 Oct 2023 11:51 pm
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