
CG में अपने स्कूल पहुंचकर भावुक हुए DRDO के डायरेक्टर जनरल डॉ. कामथ, कहा इसी स्कूल में बैठकर देखा था सांइटिस्ट बनने का सपना
बालोद. डीआरडीओ (DRDO) रक्षा मंत्रालय नई दिल्ली के डायरेक्टर जनरल डॉ. सुधीर कामथ (DRDO director general dr sudhir kamath) जिस सरकारी स्कूल में पढ़ाई किए 49 साल बाद पुन: वहां पहुंचने पर अभिभूत हो गए। स्कूल में बिताए पुराने दिन को याद कर उनकी आंखें नम हो गई। बचपन की यादों को संजोए हुए डॉ. कामथ अपनी धर्मपत्नी सुजाता के साथ बालोद के पाररास वार्ड स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। विद्यालय के बच्चों ने गुलदस्ता भेंटकर उनका स्वागत किया। उन्होंने स्कूल में अपने बैठने की जगह, कैसे घंटी बजाता था, वह सब याद किया। वे स्वामी आत्मानंद सरकारी अंग्रेजी माध्यम पहुंचे और बच्चों से बात की। स्कूल की व्यवस्था को देखकर तारीफ भी की।
शासकीय बुनियादी हायर सेकंडरी स्कूल के सभागार में आयोजित स्वागत समारोह में उन्होंने छात्र छात्राओं को संबोधित करते कहा कि मेरी पढ़ाई की शुरुआत इसी विद्यालय से वर्ष 1967 में हुई तब मैं तीसरी कक्षा में था। तब 1969 में पहली बार अपोलो यान चांद पर गया। कितनी अच्छी बात है कि इंसान चांद पर पहुंच गया और हमें भी कुछ ऐसे ही करना चाहिए। यह बात मैंने रेडियो में सुनी थी। तब रिसेस की छुट्टी में स्कूल के बाहर एक खंभे के नीचे बैठकर मैं सोचता रहा कि मैं भी साइंटिस्ट की तरह काम करूंगा। तब सोचा नहीं था कि साइंटिस्ट बनूंगा या नहीं लेकिन बाद में मेरी यही सोच मुझे यहां तक ले आई।
1967 से 1972 तक की पाररास के सरकारी स्कूल में की पढ़ाई
1967 से 1972 की अवधि में कक्षा पहली से लेकर कक्षा पांचवी तक इसी विद्यालय में पढऩे वाले रक्षा मंत्रालय नई दिल्ली के डायरेक्टर जनरल डॉ. सुधीर ने अपने बचपन की भूली बिसरी यादों को विद्यालय के बच्चों के समक्ष सिलसिलेवार रखा। उन्होंने आगे कहा की मिसाइल मैन कलाम साहब ने कहा है कि यदि आपको सूरज के समान चमकने की इच्छा है तो सूरज के समान जलना भी पड़ेगा। जलने का उनका मतलब यह था कि मेहनत करना होगा। और दूसरी बात कलाम जी कहते थे आपको अगर कुछ बनना है तो आपको सपने देखना होगा, सोते हुए नहीं पूरी तरह सजगता से कभी आप अपने मकसद में कामयाब होंगे। डीआरडीओ ने अनेक सेक्शन है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्शन और साइबर सेल सेक्शन के कार्यों में वे खासतौर से कार्य करते हैं।
शिक्षा में नहीं पड़ता कोई भी माध्यम का फर्क
डॉ. सुधीर कामथ ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं और टीचरों से कहा कि शिक्षा में माध्यम का कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता जो भी पार्टी क्रम है उसको मन लगाकर पढऩे से सफलता मिलती हैं। शिक्षकों की बातों को बच्चे जरूर मानते है। शिक्षकों को भी अपने विषयों पर अच्छी पकड़ होना चाहिए ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके।
जो भी हंू गुरुजनों की बदौलत
विद्यालय के छात्र-छात्राओं से प्रश्नोत्तरी करते उन्होंने यह भी कहा आज मैं जो कुछ भी हूं उसका सारा श्रेय मैं अपने गुरुजनों को देता हूं। बच्चों के पहले गुरु घर में माता-पिता, विद्यालय में शिक्षक गण तथा विवाह पश्चात धर्मपत्नी भी प्रेरणा स्रोत रहते हैं यही मेरे सब गुरु हैं। आप लोग भी अपने गुरुजनों माता पिता के आदेशों का पालन करें।
अभी से बना लें अपना लक्ष्य, जुट जाएं
उन्होंने आगे कहा आज पढ़ाई का माध्यम बहुत है खासकर इंटरनेट शिक्षा का एक सशक्त माध्यम है इसका भरपूर उपयोग करें। साइबर वल्र्ड की कोई सीमा नहीं है। जब आप इसमें पढ़ाई करने बैठे हैं तो आप पढ़ाई ही करें इसमें सब कुछ मिलेगा बच्चे अभी से एक लक्ष्य बना लें कि वह क्या बनना चाहते हैं। वैज्ञानिक ही बने ऐसी बात नहीं है कलेक्टर, डॉक्टर, वकील, टीचर या फिर उन्नत कृषि के क्षेत्र में भी कार्य किया जा सकता है। आज देश के बड़े-बड़े उद्योगपति कृषि के क्षेत्र में आगे आ रहे हैं।
बचपन के अपने सहपाठियों से मिले
डॉ. सुधीर कामथ विद्यालय परिसर पहुंचते ही अपने बचपन के सहपाठियों को याद किया। उन्हें विद्यालय बुलाया गया जिनमें पाररास वार्ड के अशोक साहू, सोहन साहू से आत्मीय मुलाकात की। अपने बचपन की बातों की चर्चा करते रहे। उनके साथ आए बालोद जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे, डिप्टी कलेक्टर रश्मि वर्मा, शिक्षा अधिकारी बाघ का आभार प्रदर्शन विद्यालय के प्राचार्य आरके वर्मा ने किया।
Published on:
31 Oct 2021 05:31 pm
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