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हाथियों की दहशत से नगझर में बोनी कर पा रहे किसान, नर्रा के लोगों ने पक्के छत पर ली शरण

जिले के जंगल में इन दिनों चंदा हथिनी सहित 25 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। बीते दिनों ग्राम नगझर में हाथियों के दल ने गन्ने के फसल को नुकसान पहुंचाया। जंगल से लगे गांव में हाथियों की आमद से किसान कृषि कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इस गांव में जुलाई में लगभग 70 फीसदी बोनी हो जाती थी।

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गजराज का आतंक: गन्ने की फसल को भी पहुंचा रहे नुकसान, नर्रा के लोगों ने पक्के छत पर ली शरण

ग्राम नगझर में हाथियों के दल ने गन्ने के फसल को नुकसान पहुंचाया।

बालोद. जिले के जंगल में इन दिनों चंदा हथिनी सहित 25 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। बीते दिनों ग्राम नगझर में हाथियों के दल ने गन्ने के फसल को नुकसान पहुंचाया। जंगल से लगे गांव में हाथियों की आमद से किसान कृषि कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इस गांव में जुलाई में लगभग 70 फीसदी बोनी हो जाती थी। जानकारी के मुताबिक गांव में कुल 72 किसान हैं। गांव में लगभग 200 एकड़ में कृषि कार्य होता है। अभी कई किसानों ने कृषि कार्य शुरू नहीं किया है। वहीं एक मकान व सोलर पंप को भी नुकसान पहुंचाया हैं। वहीं बुधवार को हाथियों का दल ग्राम नर्रा पहुंच गया। ग्रामीणों ने हाथियों की दहशत के बीच कच्चे मकानों को छोड़कर पक्के मकानों में चढ़कर रात बिताई।

हाथियों के चिंघाड़ से दहशत में ग्रामीण
ग्राम नगझर के ग्रामीण केंवल सिंह ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ खेत में गन्ने की फसल लगाई, जिसे हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। गांव के दो किसानों के गन्ने की फसल को पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि शाम तक दिन काट लेते हैं, लेकिन रात में दहशत में रहते हैं।

आसपास के आठ गांवों में अलर्ट
वन विभाग ने नर्रा, नहरडेरा, मुल्लेगुड़ा, नारागांव, किनारगोंदी, धरमपुरा, गोडपाल, हर्राठेमा, मुल्ले, पेटेचुआ में अलर्ट जारी कर दिया हैं। मुनादी कर ग्रामीणओं से कह रहे हैं कि देर शाम तक जंगल व खेतों में न रहें। कच्चे मकान में रहने वाले पक्के मकानों में शरण लें। मंगलवार की रात में हाथियों ने गांव में विचरण किया। वहीं रानीमाई मंदिर के सदस्यों ने भी छत पर रात बिताई।

सेल्फी लेना व वीडियो बनाना पड़ सकता है भारी
वन विभाग ने लोगों से अपील की कि हाथियों के नजदीक न जाएं और न उसका वीडियो बनाएं। बुधवार को कई लोगों को हाथियों का वीडियो बनाते देखा गया। यह लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है।

चिंघाड़ सुन जाग जाते हैं ग्रामीण
ग्राम नर्रा व नगझर के ग्रामीणों ने बताया की हाथियों का दल कब आ जाए। इसका कोई ठिकाना नहीं रहता। रात में जब हाथियों के चिंघाड़ को सुनकर ग्रामीण नींद से जाग जाते हैं। छोटे बच्चे भी रोने लगते हैं।

मिलेगा सभी प्रभावितों को मुआवजा
डीएफओ आयुष जैन ने कहा कि हाथी प्रभावित इलाकों का लगातार दौरा किया जा रहा हैं। फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जा रहा हैं। लोगों से अपील है कि हाथियों के नजदीक न जाएं।

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