
खेतों में दरारें : मानसून की बेरूखी से अन्नदाताओं के माथे पर कर्ज की चिंता
बालोद/डौंडीलोहारा. वनांचल क्षेत्र के ग्राम रेंगाडबरी के आसपास एक माह से बारिश नहीं हुई है। इससे खेतों में दरारें पड़ गई है। देखो तो ऐसा लगता है मानो यहां अब तक जुताई ही नहीं की गई है। ग्राम अन्नूटोला, फिरतूटोला, चिलमगोटा, पुनारकसा, भिमाटोला, खैरकट्टा, भीमपुरी, बंजारी, अर्जुनी, दुर्गीटोला, टोन्डेल कोन्डेल सहित अन्य गांवों में बारिश नहीं होने से किसान परेशान हैं। उनका कहना है कि सूखे खेतों में जाने से पहले सोचना पड़ता है। इसलिए गांवों में कम से कम 75 प्रतिशत किसान रोपा भी नहीं लगा पाए हैं।
खेतों से नमी गायब
खेतों में जा कर देखा जाए तो जमीन से नमी पूरी तरह से गायब दिख रही है। इसलिए दरारें पड़ गई हैं। बोए धान की फसल नष्ट होने के कगार पर है। बोता वाले धान फसल की स्थिति देखा जाए तो पूरा खेत नष्ट होने के कगार पर है। इसी वजह से मजदूरों को भी काम नहीं मिल रहा है, वे रोजगार के लिए भटक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है ऐसी ही स्थिति रही तो हमें रोजी-रोटी के लिए पलायन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
अभी तक ले बियासी नइ होए हावै, खातू ल कामे डारबो
ग्रामीणों का कहना है सूखे की स्थिति को देखते हुए शासन रोजगार मूलक काम खोला जाना चाहिए। वहीं किसानों ने कर्ज माफ ी की भी बात कहने लगे हैं। ग्रामीण डोमार सिंह शंभू, चितराखन विश्वकर्मा, नेमन साहू, बलियार, शिव कुमार सेन, दुसियानत सागर, लेखू राम यादव का कहना है अब तक खेतों में बियासी नइ होए हावै, अऊ सोसाइटी ले खातू निकाले हन तेला पानी नई गिरत हे त खातू यूरिया, पोटाश, डिएपी राखर ला कामे डारबो। अइसने में कर्ज म डूबत हन। ये परिस्थति मा सरकार ला किसान के कर्ज माफ ी करना चाही।
देवरीबंगला क्षेत्र में 90 प्रतिशत फसल सूखने के कगार पर
बालोद/देवरीबंगला. मानसून की बेरुखी का असर किसानों के चेहरे पर साफ देखा जा सकता है। अब तक इस इलाके में अच्छी बारिश नहीं होने से खेत प्यासे हैं। इस वजह से खेतों में दरार पडऩा शुरू हो गया है। ऐसे में बीज व खाद लिए किसान कर्ज को लेकर अभी से चिंतित हैं। वे पिछले साल की स्थिति न हो जाए इसको लेकर परेशान हैं। मानसून के लेट का असर देवरी बंगला क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र में लगी धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। खेतों में दरारें साफ दिखाइ देने लगी है। इसलिए ऐसे किसान जो केवल बारिश के भरोसे फसल लेते हैं वे अधिक परेशान हैं क्योंकि वे कर्ज लेकर फसल की बोआई किए हुए हैं।
बारिश के भरोसे फसल लेने वाले अधिक परेशान
इस संबंध में कृषक कृष्णा पटेल, नरेश पटेल, गणेश, माखन, परदेशी, योगेश ने बताया मौसम विभाग की ओर से इस वर्ष अच्छी बारिश होने की खबर दी गई थी। इसे लेकर हम खुश थे। इसलिए साहूकार से कर्ज लेकर उत्साह से धान की बुआई किए हैं। बारिश के भरोसे फसल लेते हैं। शुरूआत में अच्छा पानी गिरा, लेकिन पिछले 15 दिनों से बरसात ने धोखा दे दिया है। ग्राम पसौद, भंडेरा सहित अन्य ग्रामों के किसानों ने कहा तेज धूप निकलने के कारण खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पडऩे लगी हैं। लगी फसल पीली पड़ गई है जिसके कारण आगे हमारे सामने भूखो मरने की नौबत आएगी। ऐसे में हम कर्ज में दबे हुए हैं। अगर बारिश की यही स्थिति रही तो भविष्य में परिवार को कैसे पालेंगे इसकी चिंता सताने लगी है।
Published on:
07 Aug 2018 08:30 am
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