बालोद जिले में धान कटाई-मिंजाई के साथ सिंचाई साधन संपन्न किसान अब रबी फसल लेने की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि खरीफ सीजन की धान कटाई अभी भी बाकी है। खेतों में थरहा (नर्सरी) लगाने और बोआई का कार्य शुरू हो गया है। सुबह से किसान मजदूरों के साथ खेतों में पहुंचकर साफ-सफाई में जुटे हैं।
बालोद. जिले में धान कटाई-मिंजाई के साथ सिंचाई साधन संपन्न किसान अब रबी फसल लेने की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि खरीफ सीजन की धान कटाई अभी भी बाकी है। खेतों में थरहा (नर्सरी) लगाने और बोआई का कार्य शुरू हो गया है। सुबह से किसान मजदूरों के साथ खेतों में पहुंचकर साफ-सफाई में जुटे हैं। पानी की किल्लत को देखते हुए सरकार ने किसानों से रबी सीजन में धान की फसल नहीं लेने की अपील की है, इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। खेतों में पराली (नरई) को जलाकर जुताई के लिए तैयार करने से गांव-गांव के खेत-खार में आग लगाई जा रही है।
दलहन-तिलहन को बचाना मुश्किल
क्षेत्र में लगातार घट रहे भूमिगत जल के स्तर से चिंतित सरकार ने किसानों से रबी सीजन में धान के बदले दलहन-तिलहन की फसल लेने की अपील की है। किसान इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। वे धान फसल लेने की तैयारी कर रहे हैं। किसानों कहना है कि दलहन-तिलहन की फसल को प्राकृतिक आपदा, जंगली जानवर, बंदर और पशु-पक्षियों से बचाना मुश्किल होता है।
पराली जलाने से होता है खेतों को नुकसान
खरीफ फसल की हार्वेस्टर से कटाई के बाद पैरा पराली खेतों में ही छोड़ रहे हैं। इसे किसान जलाकर कर नष्ट कर रहे हैं। इससे वायु प्रदूषित होता है। साथ ही भूमि की उर्वरक क्षमता घट रही है। आगामी दिनों में मवेशियों के लिए चारा की समस्या भी होगी। कृषि वैज्ञानिकों का भी कहना है कि भूमि में फसल के लिए उपयोगी सूक्ष्म बैक्टीरया, खेतों में आग लगाने से जलकर नष्ट हो जाते हैं। इससे किसानों को नुकसान होता है। खेत में कभी भी पैरा को नहीं जलाना चाहिए।
पराली नहीं जलाने कर रहे अपील
बालोद कलेक्टर डॉ. कुलदीप शर्मा ने कहा कि खेत में पराली (नरई) न जलाने एवं गौठान में पैरादान करने अपील की जा रही है। गर्मी में धान की फसल छोड़कर दलहन-तिलहन की फसल लेने कहा जा रहा है।
किसान नहीं ले रहे रुचि
कृषि विभाग के एसडीओ जेएल मंडावी ने कहा कि किसानों को लगातार दलहन-तिलहन फसल लेने कृषि विभाग जागरूक कर रहा है। किसान दलहन-तिलहन में रुचि नहीं ले रहे हैं।
एक ही फसल बार-बार लेने से मिट्टी में आते हैं फफूंद
कृषि विज्ञान केंद्र के पौध रोग विशेषज्ञ दीपशिखा मनु चंद्राकर ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषित होती है। भूमि की उर्वरा शक्ति एवं लाभदायक तत्व नष्ट हो जाते हैं, मिट्टी में सूक्ष्मजीव खाद के रूप में विकसित होते हैं। एक ही फसल बार-बार लेने से मिट्टी में फफूंद आते हैं।