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Gandhi Jayanti: छत्तीसगढ़ का एकलौता गांव, यहां है महात्मा गांधी का मंदिर, सुबह-शाम होती है बापू की पूजा

Gandhi Jayanti: बालोद-धमतरी जिले की सीमा पर बसा छठियारा गांव छत्तीसगढ़ का एकमात्र गांव हैं, जहां महात्मा गांधी का मंदिर है। मंदिर में की सुबह शाम बापू की पूजा होती है।

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बालोद

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Dakshi Sahu

Oct 02, 2021

गांधी जयंती: छत्तीसगढ़ का एकलौता गांव, यहां है महात्मा गांधी का मंदिर, सुबह-शाम होती है बापू की पूजा

गांधी जयंती: छत्तीसगढ़ का एकलौता गांव, यहां है महात्मा गांधी का मंदिर, सुबह-शाम होती है बापू की पूजा

बालोद. आज पूरा देश महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है। बालोद-धमतरी जिले की सीमा पर बसा छठियारा गांव छत्तीसगढ़ का एकमात्र गांव हैं, जहां महात्मा गांधी (Gandhi Jayanti 2021) का मंदिर है। मंदिर में की सुबह शाम बापू की पूजा होती है। इस गांव की अनोखी परंपरा और गांधी मंदिर छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध है। मंदिर से बालोद जिले के लगभग 2 हजार से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। गांधी जयंती, गांधी पुण्यतिथि और 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस सहित 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व पर महात्मा गांधी के अनुयायियों की भीड़ लगती है। गंगरेल बांध के डुबान में स्थापित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है।

कंडेल नहर सत्याग्रह के समय गांधी की देशभक्ति से प्रभावित हुए लोग
प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष और बालोद जिला निवासी अर्जुन हिरवानी ने बताया कि मंदिर बहुत पुराना है। बालोद जिले से लगभग 2 हजार से अधिक लोग इस मंदिर से जुड़े हैं। इसके अलावा धमतरी, कांकेर जिले से भी लोग बड़ी संख्या में जुड़कर गांधी की पूजा करते हैं। मंदिर के सदस्य शिवराम ने बताया कि महात्मा गांधी के मंदिर निर्माण की कहानी पुरानी है। 1920 में जब जल सत्याग्रह में महात्मा गांधी धमतरी जिले के ग्राम कंडेल आए थे, तभी उनके भाषण व राष्ट्रभक्ति देख लोग उनके मुरीद हो गए। राष्ट्रभक्ति के लिए छठियारा के ग्रामीणों ने एक छोटी सी कुटिया में गांधी की फोटो रखकर उनकी पूजा भी करने लगे। अब धीरे-धीरे मंदिर को लोग जानने लगे। हर साल भीड़ बढ़ती जा रही है।

शराब मांस, नशे पर प्रतिबंध, सादगी से करते हैं पूजा
मंदिर परिसर में शराबखोरी, मांस-मटन या किसी भी प्रकार का नशा प्रतिबंधित है। जिस तरह से महात्मा गांधी सादे वस्त्र में रहते हैं, वैसे ही वस्त्र पहनकर पूजा की जाती है। बुनकर भी खादी के कपड़े मंदिर में चढ़ाते हैं। मंदिर को देखने व यहां की परंपरा को समझने दूर-दूर से लोग आते हैं।

प्राकृतिक वातावरण भी आकर्षण का केंद्र
गंगरेल के डुबान में स्थापित यह मंदिर प्राकृतिक वातावरण रमणीय है। इस जगह की खूबसूरती को देखने बड़ी संख्या में लोग आते हैं। पहाड़ की ऊंचाई से गंगरेल जलाशय का पानी और हरियाली के साथ चलती ठंडी हवा लोगों को आकर्षित करती है।