
सूख रहीं फसलें
बालोद. जिले में सूख रही फसलों को बचाने के लिए सभी जलाशय से पानी छोड़ा गया है। जिन किसानों के खेतों में नहर का पानी जा रहा है, वहां की फसलें लहलहा रही हैं। लेकिन जिले में कई ऐसे भी गांव हैं, जहां जलाशयों का पानी नहीं पहुंच पाता। ऐसे में इस गांव के लोग निजी बोर के भरोसे सिंचाई करते हैं। पर जहां बोर से भी सिंचाई नहीं हो रही, वहां की फसलें अब सूखने की स्थिति में आ गई हैं। खेतों में दरारें पड़ गई हैं। ऐसी ही स्थिति जिले के ग्राम कुरदी की है, जहां खेतों में अब दरार पडऩे लगी है व फसल सूखने की स्थिति में है। यहां किसानों की चिंता यह है कि अगर बारिश नहीं हुई तो फसल सूखना तय है। हर हाल में फसल को बचाने पानी की जरूरत है।
बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे किसान
यहां के किसान लगातार भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि हर हाल में बारिश हो जाए ताकि सूखते फसलों को नया जीवन मिल पाए। इतना तो तय है कि बारिश नहीं होने से फसलों का विकास जैसा होना चाहिए, वैसा नहीं हुआ है, जिससे उत्पादन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
गांव के 300 एकड़ में लगी फसल सूखने की स्थिति में
किसान तुकाराम साहू ने बताया कि गांव में 450 एकड़ खेती भूमि है। लेकिन 300 एकड़ की जो कृषि भूमि है, वहां सिंचाई के साधन नहीं हैं। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं अब किसान फसलों की स्थिति देख चिंतित हैं।
2 एकड़ में लगी फसल, अब खेतों में पड़ गई दरार
किसान कमल साहू ने बताया कि वह लगभग दो एकड़ में धान की खेती कर रहा है। बारिश नहीं होने की वजह से खेतों में दरार पडऩे लगी है। यही स्थिति रही तो गांव के कई किसान ऐसे हैं, जिनके पास् सिंचाई के साधन नहीं हैं, जिससे फसलें सूख जाएंगी।
सावन में मानसून ने की दगाबाजी
इस साल सवान 4 जुलाई से शुरू हुआ, जो 31 अगस्त तक चला लेकिन इस पूरे सावन माह में अच्छे से बारिश नहीं हुई। इसे किसानों ने सावन की दगाबाजी करार दिया। शुरुआात में तो अच्छी बारिश हुई लेकिन बाद में ऐसा रूठा कि किसानों की चिंता बढ़ गई। पूरे सावन महीने में मात्र 492 मिमी ही बारिश हुई।
जिले के जलाशय किसानों के लिए तारणहार बने
जिले के सभी किसानों के खेतों तक भले ही जलाशय का पानी न पहुंच रहा हो लेकिन जिन किसानों के खेतों तक पानी पहुंच रहा है, उन किसानों के लिए जिले के चार प्रमुख जलाशय व छोटे बांध सूखती फसलों को बचाने तारणहार बने हुए हैं। वहीं बीते एक महीने से जलाशयों से पानी चल रहा है।
Published on:
02 Sept 2023 10:38 pm

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