
बालोद. मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री की ओर से एक कार्यक्रम में नाई को जातिसूचक शब्द नाऊ कहने पर जिला सेन समाज बालोद ने विरोध जताया है। शनिवार को समाज के लोगों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए इस ओर ध्यानाकर्षित करने की मांग की है। जिला सेन समाज के अध्यक्ष जगनलाल कौशिक ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नाई को जातिसूचक नाऊ शब्द का प्रयोग किया। जिसके कारण छत्तीसगढ़ नाई समाज दुखी है।
उपहास किया गया
छत्तीसगढ़ की परम्परा, भाषा और संस्कृति के जानकार के रूप में हम सबके चहेते हैं। ऐसे में बार-बार नाऊ संबोधित करने से पीड़ा होना स्वभाविक है। छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में जाति को लेकर इस तरह संबोधन जाति विशेष को आंकते हुए अपमानित करने के लिए होता है। हमें यह स्वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि दबे-कुचले नाई समाज को पहले बहुत तिरस्कार सहना पड़ा है। सम्मानपूर्वक सेन भाई या नाई कभी नहीं कहा गया। नाऊ बोलकर उपहास किया गया।
नाऊ जाति नहीं
शासकीय दस्तावेज में जाति नाई है नाऊ नहीं। मुख्यमंत्री ग्रामीण पृष्ठभूमि से भलीभांति परिचित, विवेकवान राजनीतिज्ञ हैं। सेन समाज ने सभी जनप्रतिनिधियों और हर समाज से विनती की है कि नाई जाति के लोगों को नाऊ ना कहे। नाई समाज का सरोकार हर समाज से होता है। नाई समाज हर समाज का सम्मान करता है और यही अपेक्षा सभी से करता है।
ठाकुर कहलाने का हक
भगवान श्रीहरि के बाद हमारी जानकारी में तीन समाज को ठाकुर कहलाने का सम्मान प्राप्त है, जिसमें एक नाई समाज है। राजपूत समाज को ठाकुर कहलाने का सम्मान प्राप्त है। क्योंकि राजपूत मातृभूमि की रक्षा करने अपना सिर कटवाने से नहीं हिचकते। एक ठाकुर आदिवासी गोंड़ समाज के भाई होते हैं, ये प्रकृति के उपासक होते हैं। प्रकृति की सेवा करते हैं, पूजा करते हैं। इस दौरान उपाध्यक्ष संतोष श्रीवास, सचिव जितेंद्र श्रीवास, कोषाध्यक्ष झगगर सिंह कौशिक, सहसचिव मोहनलाल भारद्वाज, विक्की भारद्वाज आदि उपस्थित थे।
Published on:
05 Sept 2021 05:09 pm
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