8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विश्व साक्षरता दिवस पर पढि़ए बालोद जिले की महिलाओं की कहानी, जो अनपढ़ है पर फर्राटे से चलाती हैं कंप्यूटर

विश्व साक्षरता दिवस पर बताने जा रहे हैं। बालोद जिले की 55 वर्षीय तुलसी मानिकपुरी, जो शिकारी पारा की रहने वाली है, वह अनपढ़ है। (World Literacy Day 2020)

2 min read
Google source verification

बालोद

image

Dakshi Sahu

Sep 08, 2020

विश्व साक्षरता दिवस पर पढि़ए बालोद जिले की महिलाओं की कहानी, जो अनपढ़ है पर फर्राटे से चलाती हैं कंप्यूटर

विश्व साक्षरता दिवस पर पढि़ए बालोद जिले की महिलाओं की कहानी, जो अनपढ़ है पर फर्राटे से चलाती हैं कंप्यूटर

बालोद. कुछ सीखने के लिए उम्र बाधा नहीं होती। जज्बा हो तो कभी भी सफलता हासिल की जा सकती है। खुद के आत्मविश्वास पर कायम रहें तो मंजिल की चुनौती भी आसान हो जाती है। ऐसी ही कुछ कहानी विश्व साक्षरता दिवस पर बताने जा रहे हैं। बालोद जिले की 55 वर्षीय तुलसी मानिकपुरी, जो शिकारी पारा की रहने वाली है, वह अनपढ़ है। महिला में पढऩेे और तकनीक सीखने की इस कदर इच्छा शक्ति थी कि उन्होंने उम्र के बंधन को तोड़कर अन्य महिला साथियों के साथ ही कम्प्यूटर की शिक्षा हासिल करने का निर्णय लिया।

अक्षरों का ज्ञान न होने की मिथ्या को तोड़कर महिलाओं ने डिजिटल शिक्षा से अपने ज्ञान को विस्तार दिया। खुद तो डिजिटल साक्षर हुईं। अन्य महिलाओं को भी जोड़कर डिजिटल साक्षर कर रही हैं। कभी चूल्हा-चौका और बुढ़ापे में राम नाम जपने वाली ये महिलाएं अब कंप्यूटर स्क्रीन से नजरें मिलाकर, फर्राटे से की-बोर्ड और माउस पर उंगलियां दौड़ाती हैं। इसमें पुरुष भी पीछे नहीं है।

यहां जवाहर पारा निवासी रूपेश सोनकर भी आंख कमजोर होने के बावजूद फर्राटेदार कम्प्यूटर चला लेते हैं। ऐसी इच्छा शक्ति वाले लोगों की बदौलत आज जिला साक्षरता के मामले में प्रदेश में बेहतर स्थिति में है। 2011 कि जनगणना के मुताबिक जिले की साक्षरता दर 74.16 फीसदी है, जो अब बढ़कर ज्यादा हो गई है।

कभी नहीं सोचा था कि कंप्यूटर चलाएंगे
प्रशिक्षण ले चुकी तुलसी मानिकपुरी ने बताया कि वह अनपढ़ है। कभी सोचा नहीं था कि वह कम्प्यूटर चलाएगी। हमेशा बर्तन साफ करना, पोछा लगाना ही जिंदगी का हिस्सा लग रहा था। बालोद जिला मुख्यालय में संचालित ई-साक्षरता ट्रेनिग सेंटर में एक साल में 251 महिलाओं को कम्यूटर चलाने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। महिलाएं व पुरुष खुद ही कम्प्यूटर चलाने लगे हैं। साथ ही ऑनलाइन पैसा भी ट्रांसफर करना भी सीख गए हैं।

कोरोना के कारण बंद हो गया प्रशिक्षण
ई-साक्षरता ट्रेनिंग सेंटर की ई-एजुकेटर पूर्णिमा विश्वकर्मा ने बताया कि 2019 से यह प्रशिक्षण केंद्र खुला है। यहां पर 14 से 60 वर्ष की कुल 251 महिलाओं को कम्प्यूटर चलाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। महिलाएं कम्प्यूटर से ही ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर करना, कम्प्यूटर चलाना, फोटो बनाना सीख गई हैं। वर्तमान में 25 और प्रशिक्षण ले रहे थे। कोरोना की वजह से मार्च से प्रशिक्षण बंद है। कोरोना संक्रमण के बाद यह प्रशिक्षण फिर शुरू कर दिया जाएगा।

मिलती है 600 रुपए स्कॉलरशिप
ई-साक्षरता ट्रेनिंग सेंटर में 14 से 60 वर्ष के बीच के कोई भी महिलाएं ट्रेनिंग ले सकती हंै। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद व कम्प्यूटर परीक्षा में पास होने के बाद महिलाओं को प्रोत्साहन के तौर पर 600 रुपए छात्रवृत्ति भी दी जाती है।