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सावनाही पूजा : अच्छी बारिश और फसल के लिए किसान करते हैं देवी-देवताओं से प्रार्थना, जानिए छत्तीसगढ़ की इस परंपरा के बारे में

Saavan 2023 : ग्रामीण अंचल में किसान श्रावण महीने के प्रत्येक रविवार को एक दिन कृषि कार्य बंद रखकर अच्छी फसल की कामना करेंगे।

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सावनाही पूजा :  अच्छी बारिश और फसल के लिए किसान करते हैं देवी-देवताओं से प्रार्थना, जानिए छत्तीसगढ़ की इस परंपरा के बारे में CG Admission 2023: इस योजना से प्राइवेट स्कूल में मिलेगा दाखिला, 21 जुलाई ला

सावनाही पूजा : अच्छी बारिश और फसल के लिए किसान करते हैं देवी-देवताओं से प्रार्थना, जानिए छत्तीसगढ़ की इस परंपरा के बारे में CG Admission 2023: इस योजना से प्राइवेट स्कूल में मिलेगा दाखिला, 21 जुलाई लास्ट डेट, मात्र 1339 सीटें शेष

गुंडरदेही . ग्रामीण अंचल में किसान श्रावण महीने के प्रत्येक रविवार को एक दिन कृषि कार्य बंद रखकर अच्छी फसल की कामना करेंगे। छत्तीसगढ़ में अपनी संस्कृति के अनुरूप विभिन्न त्योहार मनाएं जाते हैं। इसी आस्था के आधार पर किसान सावनाही त्योहार मना रहे हैं।

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घर की दीवारों पर गोबर से बनाते हैं चित्रकला

किसानों ने बताया कि यह त्योहार पूर्वजों के समय से मनाया जा रहा है। त्योहार में ग्रामीण अच्छी बारिश और फसल के लिए ग्राम के देवी-देवताओं से प्रार्थना करते हैं। इस दिन कृषि कार्यों को नहीं किया जाता है। ग्रामीण मिलजुल कर त्योहार को मनाते हैं। साथ ही घरों में तरह-तरह के व्यजंन भी बनाए जाते हैं।

घरों की दीवारों पर गाय के गोबर से लेपन कर विशेष प्रकार की आकृति और चित्रकला बनाई जाती है। इसे शगुन का परिचायक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस गोबर से बनी चित्रकला घर का वातावरण शुद्ध करती है और बाहरी बीमारियों का घरों में प्रवेश नहीं होने देती।

श्रावण के हर रविवार को होती है पूजा

शनिवार को रात्रि में गुंडरदेही ब्लॉक के विभिन्न ग्रामों के किसानों ने सावनाही पूजा की। अच्छी फसल की कामना को लेकर रविवार को कृषि कार्य बंद रखकर इतवारी त्यौहार मनाया। 4 जुलाई से श्रावण माह आरंभ हो चुका है। इसका समापन 31 अगस्त को होगा।

सावनाही दवाइयों को गाड़ा गया

मान्यताओं के अनुसार श्रावण में ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रकार के रोगों और जहरीले जीव-जंतुओं से बचने घर के मुख्य द्वार पर सावनाही दवाइयों को जमीन में गाड़ा गया। साथ ही गांव की सीमा को बैगा बुलाकर नकारात्मक चीजों से बचाने पूजा पाठ की गई।

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