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बालोद में मासूम बच्चे के साथ भटकते मिली झारखंड की महिला, भूख में थी ऐसी बेहाल, खुद का नाम तक नहीं बता पाई

दो महीने से भूख, प्यास और लाचारी में भटक रही झारखंड की महिला और उसके मासूम बच्चे को महिला बाल विकास विभाग ने समय रहते रेसक्यू करके न सिर्फ उसकी जान बचाई बल्कि दोनों को आश्रय भी प्रदान किया।

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बालोद

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Dakshi Sahu

Feb 04, 2021

बालोद में मासूम बच्चे के साथ भटकते मिली झारखंड की महिला, भूख में थी ऐसी बेहाल, खुद का नाम तक नहीं बता पाई

बालोद में मासूम बच्चे के साथ भटकते मिली झारखंड की महिला, भूख में थी ऐसी बेहाल, खुद का नाम तक नहीं बता पाई

बालोद. दो महीने से भूख, प्यास और लाचारी में भटक रही झारखंड की महिला और उसके मासूम बच्चे को महिला बाल विकास विभाग ने समय रहते रेसक्यू करके न सिर्फ उसकी जान बचाई बल्कि दोनों को आश्रय भी प्रदान किया। सखी वन स्टॉप सेंटर के प्रभारी केन्द्र प्रशासक ने बताया कि सखी वन स्टॉप सेंटर में 29 जनवरी को दूरभाष से सूचना मिली कि एक महिला एवं बच्चा बालोद से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर दल्लीराजहरा मार्ग में दैहान मोड़ के पास भटक रहे हैं। सूचना मिलते ही तत्काल सखी टीम ने थाना बालोद को जानकारी दी।

कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी महिला
सखी टीम और थाना बालोद की टीम ने महिला एवं बच्चे को रेसक्यू किया और दोनों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जिसमें दोनों स्वस्थ पाए गए। स्वास्थ्य जांच के बाद महिला और बच्चे को सखी सेंटर में अस्थायी आश्रय के लिए लाया गया। महिला अपने बच्चे के साथ कई दिनों से आसपास के गांव में भूखे-प्यासे भटक रही थी। महिला कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी। सखी सेंटर में आने के बाद दोनों को सुविधा मुहैया कराई गई।

काउंसलिंग में बताया भीख मांगकर किसी तरह भरती थी बच्चे का पेट
दूसरे दिन महिला की काउंसलिंग की गई, लेकिन महिला ने कुछ बात नहीं की। वह सिर्फ सामने वालों की भाषा समझ रही थी। इसके बाद महिला धीरे-धीरे स्टाफ वालों से घुली-मिली तब कुछ-कुछ बोलना शुरू की। उसने बताया कि वह लगभग दो माह से भटक रही है और भीख मांगकर खा रही थी। महिला ने अपना नाम नीमन पति मनुहर कंडुल पता झारखंड बताया। प्रभारी केन्द्र प्रशासक ने बताया कि महिला के निवास स्थान का सही पता नहीं होने के कारण व शासन के माध्यम से निर्धारित अवधि तक आश्रय दिया जाता है। इन परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए महिला और उसके बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशानुसार महिला और उसके बच्चे को पुनर्वास के लिए नारी निकेतन रायपुर भेजा गया।

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