
कवर्धा. शहर में ऐसे कई होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां अवैध तरीके से घरेलू गैस सिलेंडर का खुले आम इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें चाट-गुपचुप और समोसे बेचने वाले छोटे व्यवसायी भी पीछे नहीं है।
'लाल टंकी' से काला खेल का यह दृश्य रोजाना ही चौक-चौराहों पर आसानी से देखें जा सकते हैं। बावजूद इसके खाद्य विभाग इनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले रहा है। पत्रिका की टीम ने बुधवार को बस स्टैण्ड, गुरुनानक चौक, नवीन बाजार, वीर स्तंभ चौक, अंबेड़कर चौक, करपात्री चौक और जनपद पंचायत के आसपास निरीक्षण के लिए निकले। जहां घरेलू गैस सिलेंडर का धड़ल्ले से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा था। ये तमाम जगहें ऐसी हैं, जहां छोटे व्यवसायी ठेलों में पाव-भाजी, समोसे, चाट-गुपचुप और अंडे की दुकान चलाते हैं। ज्यादातर दुकानों में खाद्य सामग्री बनाने कॉमर्शियल के बजाय घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल होता है।
छिपाकर रखे
घरेलू सिलेंडर को ठेलों के नीचे छिपाकर रखी जाती है। सिलेंडर पर किसी की नजर न पड़ जाए, इसलिए टंकी को जूट के बोरे या फिर कपड़े से लपेटकर रखा जाता है। घरेलू सिलेंडर को अवैध तरीके से बेचा जा रहा है।
शादी ब्याह में उपयोग
इन दिनों वैवाहिक सीजन भी है। शहर में जगह-जगह वैवाहिक कार्यक्रम हो रहे हैं, जहां खाना बनाने के लिए घरेलू सिलेंडर ही धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं। बावजूद इसके आज पर्यंत खाद्य विभाग के अधिकारियों ने इसके खिलाफ कार्रवाई करने मुहिम नहीं छेड़ा।
डिलीवरी से एजेंसी तक जुगाड़
आमतौर पर उपभोक्ता को घरेलू सिलेंडर पाने के लिए गैस एजेंसी का लगातार चक्कर काटना पड़ता है। पहले नंबर लगाना पड़ता है। फिर एक सप्ताह बाद उपभोक्ताओं को सिलेंडर देने रसीद काटी जाती है। वह भी तब गोदाम में पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध होता है। किंतु होटल व रेस्टोरेंट संचालकों का एजेंसी से लेकर डिलीवरी मैन तक जुगाड़ रहता है। इसके चलते उन्हें आसानी से घरेलू सिलेंडर तुरंत मिल जाते हैं।
होटल व अन्य दुकानों में घरेलू सिलेंडर का उपयोग हो रहा है। इसकी जानकारी नहीं मिली है। निरक्षक समय समय पर निरीक्षण करते हैं। गैस एजेन्सी को घरेलू सिलेंडर देने से मना किया जाएगा। बड़े होटलों में घरेलू सिलेंडर का उपयोग नहीं हो रहा है।
डॉ एचएल बंजारे, नियंत्रक, खाद्य विभाग कबीरधाम
Published on:
29 Mar 2018 07:22 pm
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