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ठंड में ही सूख गया छत्तीसगढ़ की ये दो बड़ी नदियां, गर्मी में होगी पानी की किल्लत

एनीकटों में भरपूर पानी है, लेकिन अब इसे सुरक्षित बनाए रखने की पूरी कोशिश है। ताकि गर्मी के दिनों में पानी को लेकर किल्लत का न हो।

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बलौदाबाजार/भाटापारा. जिले से होकर बहने वाली महानदी और शिवनाथ नदी का जल प्रवाह पूरी तरह ठहर चुका है। हालांकि एनीकटों में भरपूर पानी है, लेकिन अब इसे सुरक्षित बनाए रखने की पूरी कोशिश है। ताकि गर्मी के दिनों में पानी को लेकर किल्लत का न हो। विभाग ने पाया है कि बीते साल की तुलना में दोनों नदियों में लगभग एक पखवाड़े पहले जल प्रवाह बंद हो चुका है।

महानदी और शिवनाथ नदी जो जिले की प्यास बुझाती है। फसलों को जीवन देती है। भू-जल का स्तर भी बनाए रखती है। इस बार यह अभी से अपने ही पानी के लिए तरसने लगी है। एनीकट के अलावा शेष हिस्सा पूरी तरह सूखा है। क्योंकि बारिश की मात्रा उतनी नहीं थी जितना इसके प्रवाह के लिए होना था।

जिले में महानदी 50 किलोमीटर के क्षेत्र में प्रवाहित होती है। जबकि शिवनाथ का बहाव क्षेत्र 45 किलोमीटर है। इन दोनों नदियों के तटीय इलाके इसके पानी का उपयोग पेयजल सिंचाई और निस्तार के लिए तो करते ही हैं। साथ ही इनसे दूर के शहरों को भी पानी मिलता है। ये भू-जल स्त्रोत को बनाए रखने मे पूरी ताकत से मदद करती है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार महानदी और शिवनाथ से वाटर फ्लो लगभग बंद हो चुका है। जगह-जगह उभर आई चट्टानें इस बात की गवाह है। दोनों नदियों पर बने सात एनीकट में ही पानी का भराव शेष है। यह हालांकि काफी लंबे क्षेत्र में है। लेकिन अगली बारिश के लिए अभी पूरे साढ़े पांच माह हैं। ऐसे में गर्मी में पेयजल सहित निस्तारी के लिए लोगों को तरसना पड़ सकता है।

महानदी और शिवनाथ की ताजा स्थिति को देखते हुए विभाग अब इन दोनों नदियों की एक-एक बूंद को बनाए रखने और संरक्षण के लिए संकल्प ले चुका है।

एनीकट का पानी भराव
क्षेत्र पूरी तरह विभाग की निगरानी में रहेगी। गेट की जांच रात और दिन दोनों वक्त की जाएगी। हर वह उपाय किए जाएंगे जिनकी मदद से पानी का संरक्षण मुमकिन होगा।

महानदी और शिवनाथ दोनों नदियों में जल प्रवाह लगभग खत्म हो चुका है। लेकिन एनीकट में भरपूर पानी है। इसकी सुरक्षा और संरक्षण पर गंभीरता से काम किए जाने के लिए फिल्ड स्टॉफ को निर्देशित किया गया है।
संजय दीक्षित, ईई जलसंसाधन, बलौदाबाजार


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