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पत्थरों के अवैध खनन के लिए राजस्व व वन भूमि पर बारूद से हो रही ब्लास्टिंग, लोग परेशान, जिम्मेदार मौन

Illegal stone mining: सभी नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे अधिकांश क्रशर खदान (Crusher mine), दर्जनभर स्थानों से अवैध रूप से निकाले जा रहे पत्थर (Stone)

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पत्थरों के अवैध खनन के लिए राजस्व व वन भूमि पर बारूद से हो रही ब्लास्टिंग, लोग परेशान, जिम्मेदार मौन

Illegal stone

राजपुर। क्रशर खदानों में खपने वाले पत्थर अवैध तरीके से वन एवं राजस्व भूमि से निकाले जा रहे हैं। कभी ड्रिल मशीन के जरिए तो कभी ब्लॉस्ट (Blast) करके पत्थरों को जमीन से निकाला जाता है। बड़े पैमाने पर चल रहे कारोबार पर प्रशासन या वन विभाग (Forest department) का ध्यान नहीं है, यदि है भी तो कार्रवाई के नाम पर मजदूरों पर मामला दर्ज कर लिया जाता है।

खदानों से उडऩे वाली धूल से इलाके का पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा हैं लेकिन सम्बधित महकमा भी इस ओर से बिल्कुल बेपरवाह है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।


बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के धौरपुर, कोटागहना एवं राजपुर क्षेत्र की शासकीय व वन भूमि पर दर्जनभर स्थानों से अवैध खनन कर पत्थर (Illegal stone) निकाले जा रहे हैं। इन पत्थरों को क्रशर खदान में भेज दिया जाता हैं। अवैध खनन में इलाके के ग्रामीण महिला-पुरुष कार्यरत हैं जो कई बार असुरक्षित ब्लास्टिंग से घायल हो चुके हैं।

खदान संचालित करने वाले लोग पत्थरों को ब्लास्ट के जरिए सुबह ही निकालते हैं ताकि अधिकारियों को इसकी भनक न लगे। राजपुर, कोटागहना, भेस्की, धौरपुर, भिलाई, चंगोरी, गागर नदी, डिगनगर के आसपास संचालित क्रशर प्लांट में वाहनों से कई ट्रिप पत्थर भेजे जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक क्रशर संचालकों को वन एवं राजस्व विभाग का मौन संरक्षण प्राप्त है जिसके चलते वे मनमाने ढंग से पत्थरों का अवैध खनन कर रहे हैं।

इतना ही नहीं क्रशर संचालकों के इशारे पर ही अधिकारी मजदूरों पर अवैध खनन का मामला बनाकर खानापूर्ति भी कर लेते है। कई ऐसे भी ग्रामीण हैं जिन्हें हजार-दो हजार रुपए देकर उनकी जमीन पर खनन कराया जा रहा है। इलाके में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध खनन से वन क्षेत्र का पर्यावरण भी प्रभावित होने लगा हैं।

क्रशर प्लांट से दिनरात उडऩे वाली धूल व शोर से लोगो का स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगा हैं। ग्राम भेस्की आसपास के पहाड़ी कोरवा अवैध ब्लास्टिंग होने के कारण अपना घर छोड़ कर भाग रहे हैं। अवैध ब्लास्टिंग होने के कारण घरों में दरारें पडऩे लगी है। धूल से स्वास्थ्य खराब होने लगा है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि ठेकेदारों द्वारा पहाड़ी कोरवा एवं आदिवासियों का जमीन पर कब्जा कर अवैध कारोबार किया जा रहा है। कई क्रशर दस्तावजो में सील हैं, मगर मौके पर अभी भी अवैध संचालन किया जा रहा है।

राजपुर क्षेत्र में स्वीकृत लीज 28 व सरगुजा जिले में 52 हैं मगर कई स्वीकृत लीज स्थल पर आज तक क्रशर संचालकों ने खुदाई तक नही की है। मगर सरकार से उन्हें पीट पास हमेशा जारी होते रहे हैं।


छोटे झाड़ के जंगल में भी संचालित
कई क्रशर छोटे झाड़ के जंगल में भी संचालित हैं। राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों से मिलीभगत कर ये खेल क्रशर संचालकों द्वारा किया गया है। शासकीय भूमि का नामांतरण करा फर्जी तरीके से डायवर्सन भी कराकर उस भूमि पर क्रशर संचालित हैं। वहीं कई क्रशर संचालकों के पास आज तक जमीन का डायवर्सन, पीटपास, लीज, पर्यावरण, ब्लास्टिंग, भंडारण आदि दस्तावेज तक नहीं है।


ब्लास्टिंग के लिए बारूद कहां से आता है
पत्थर निकालने ब्लास्टिंग के लिए बारूद कहा से आता हैं आज तक किसी को मालूम नही है। इसका स्टॉक रूम कहा है, कोई पता नही है। अवैध बारूद से कभी भी बड़ी घटना घट सकती है। क्षेत्र में बेखौफ ट्रैक्टर लगा कर ड्रिल मशीन से सुरंग बना कर अवैध ब्लास्टिंग जोरो से संचालित है। एक माह पहले बरियों क्षेत्र के बघिमा में 190 नग 25 किलो अवैध बारुद लावारिस हालत में मिला था। इस संबंध में आज तक पता नहीं चल सका।


धूल से इन गांवों के लोग परेशान
राजपुर सहित कोटागहना, गागर नदी के उपर, बघिमा, भिलाई, भेस्की, चंगोरी, धौरपुर, डिगनगर आदि स्थानों पर दर्जनों क्रशर संचालित हैं। ब्लास्टिंग पत्थर व क्रशर से उडऩे वाले धूल से ग्रामीण परेशान हंै। आए दिन ग्रामीणों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है।


फिर से जल्द करेंगे कार्रवाई
कुछ दिनों पूर्व ही ग्राम भिलाई में दो क्रशर को सील किया गया था। अवैध खनन रोकने के लिए टीम गठित की गई है, जल्द कार्रवाई की जाएगी।
आरएस लाल, एसडीएम, राजपुर

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