4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छत्तीसगढ़ के इस जिले में यमराज बनकर दौड़ रहे वाहन, 5 साल में 707 लोगों के खून से लाल हुईं सडक़ें, 1016 घायल

Road accident: वर्ष 2019 में ही इस जिले में 156 लोगों की सडक़ हादसे में हो चुकी है मौत, घायलों की संख्या 268, आए दिन हो रहे सडक़ हादसे के कारण घरों में पसर रहा मातम

3 min read
Google source verification
छत्तीसगढ़ के इस जिले में यमराज बनकर दौड़ रहे वाहन, 5 साल में 707 लोगों के खून से लाल हुईं सडक़ें, 1016 घायल

Bus-truck accident

रामानुजगंज। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की सडक़ें आए दिन किसी के खून से लाल हो रहीं हैं, दरअसल यहां कि सडक़ों के नाम इतनी दुर्घटनाएं हैं कि इन पर चलना खतरे से खाली नहीं। क्लिंकर, गिट्टी और बाक्साइट लोड भारी वाहनों सहित तेज रफ्तार चार पहिया वाहन सडक़ों पर मौत बन कर दौड़ रहे हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण लगा पाने वाला कोई नहीं है। (Road accident)

बीते 5 सालों में 707 मौतें इन्हीं सडक़ों के नाम है, वहीं 1016 लोग घायल हो चुके हैं। इन घायलों में कइयों की मौत भी हो चुकी है। वहीं जिले में वर्ष 2019 में सडक़ दुर्घटना में 156 लोगों की मौत हुई, वहीं 268 लोग घायल हुए।


गौरतलब है कि बलरामपुर रामानुजगंज जिले में सडक़ों की स्थिति अत्यंत दयनीय होने एवं तेज रफ्तार के साथ ओवरलोड वाहन, यातायात के नियमों का पालन नहीं किए जाने से अधिकांश सडक़ दुर्घटनाएं होती हैं।

2018 में मृतकों की संख्या 187 थी, घायलों की संख्या 233 थी, 2019 में यह आंकड़ा घटा मृतकों की संख्या 156 रही परंतु घायलों की संख्या में वृद्धि हुई। 2019 में घायल 268 हुए। (Death in road accident)

यातायात और आरटीओ विभाग के लापरवाह रवैये से अधिकांश दुर्घटनाएं होती हैं, यदि यह दोनों विभाग यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करें एवं ओवरलोड वाहनों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाएं तो इससे दुर्घटनाओं में और कमी आ सकती है, वहीं सडक़ें भी सुरक्षित रहेंगी।

समय-समय पर कहने को तो यातायात विभाग द्वारा जन जागरूकता अभियान चलाया जाता है परन्तु महज यह कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रहता है। जब इसकी जमीनी क्रियान्वयन की बारी आती है तो विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाता है। यही हाल आरटीओ का भी है, यदि यह दोनों विभाग अपने कार्य शैली में परिवर्तन लाते हैं तो दुर्घटनाओं का आंकड़ा घट सकता है।

नेशनल हाईवे 343 की यदि इतनी जर्जर स्थिति है तो इसका एकमात्र कारण ओवरलोड वाहन ही हैं। यदि ओवरलोड वाहनों पर यातायात विभाग एवं आरटीओ की मेहरबानी नहीं होती तो सडक़ की ऐसी दुर्गति नहीं होती, न ही इतनी संख्या में दुर्घटनाएं होती।

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019 में सबसे अधिक मृतकों की संख्या नवंबर माह में रही। इस माह में 29 सडक़ दुर्घटनाओं में 20 लोगों की मृत्यु हुई एवं 17 लोग घायल हुए।


सबसे अधिक दुर्घटना एनएच पर
बलरामपुर रामानुजगंज जिले में सबसे अधिक दुर्घटनाएं रामानुजगंज से राजपुर के बीच नेशनल हाईवे 343 में घटित हुई। सन 2018 एवं सन 2019 में कोई ऐसा महीना नहीं रहा जिसमें नेशनल हाईवे 343 पर दुर्घटनाएं नहीं हुई हो।


ओवरलोड वाहन दुर्घटना की वजह
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में ओवरलोड वाहन दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनते हैं। नेशनल हाइवे 343 पर चलने वाली ओवरलोड वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। वहीं सडक़ भी ओवरलोड वाहनों से लगातार खराब हो रहे हैं परंतु जिम्मेवार आंख मूंदे बैठे हुए हैं।


मृतकों में सबसे अधिक नौजवान
बीते 5 वर्षों में जिले में हुई सडक़ दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मृतकों की संख्या 40 वर्ष से कम आयु के नौजवानों की है। जो सडक़ दुर्घटना में अकाल मृत्यु के शिकार हुए।


तेज रफ्तार व शराब पीकर वाहन चलाना दुर्घटना का कारण
अंधा मोड़, शराब पीकर वाहन चलाना, तेज रफ्तार सहित अन्य कारणों से सडक़ दुर्घटनाएं होती हैं। हम लोग द्वारा मासिक रिपोर्ट तैयार की जाती है एवं इसकी समीक्षा भी की जाती है। रिपोर्ट को पुलिस मुख्यालय भेजा जाता है। समय-समय पर जन जागृति अभियान चला कर सडक़ दुर्घटना के कारणों को दूर करने का लगातार प्रयास किया जाता है।
प्रशांत कतलम, एडिशनल एसपी, बलरामपुर

बलरामपुर जिले में सडक़ दुर्घटना की खबरें पढऩे के लिए क्लिक करें- Road accident in Balrampur