29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मासूम को दी गयी ऐसी प्रताड़ना, जिसे सुनकर पत्थरदिल इन्सान भी रो पड़े

मासूम को दी गयी ऐसी प्रताड़ना, जिसे सुनकर पत्थरदिल इन्सान भी रो पड़े  

2 min read
Google source verification
balrampur

बलरामपुर.पहले मां ने उसे पिता से दूर किया फिर दुधमुंहे भाई को बेंचकर किसी और से शादी करके लापता हो गयी। उसके बाद नानी भी उसे किराये के मकान में अकेला छोड़कर गायब हो गयी। फिर एक साल तक बन्धक बनाकर 10 साल की इस मासूम को इतनी प्रताड़ना दी गयी जिसे सुनकर पत्थरदिल इन्सान भी रो पड़े। 19 माह तक प्रताड़ना का दंश झेलने वाली यह मासूम जब अपने दादी और बाबा से मिली तो वह भावुक दृश्य देखकर सभी की आंखें नम हो गयी।

यह दास्तां है 10 साल की मासूम रुबी लाला की है। गौरा चौराहा थानाक्षेत्र के मटियरिया गांव के रहने वाले ओमप्रकाश के चार बच्चों में सबसे बड़ी है रुबी लाला। रुबी का पिता ओम प्रकाश अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ बलरामपुर और सिद्धार्थनगर के सीमावर्ती गांव गागपुर में मिठाई की दुकान करते था। अगस्त 2016 में रुबी की मां आरती और पिता ओम प्रकाश में किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। घटना के दूसरे दिन जब ओम प्रकाश अपने दो बच्चों को लेकर किसी काम से मटियरिया गांव चला आया तो आरती रुबी और दुधमुंहे बच्चे सचिन के लेकर गोरखपुर अपनी मां के यहां चली गयी। कुछ दिन बीते ही थे कि आरती ने अपने दुधमुंहे बच्चे सचिन को बेंच दिया।

रुबीलाला ने अपनी मां के इस हरकत का विरोध किया लेकिन उसकी एक न सुनी गयी। कुछ दिन बाद रुबीलाला की मां आरती किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शादी कर लापता हो गयी। रुबीलाला नानी के साथ किराए के माकान में रह रही थी। लेकिन एक दिन उसकी नानी भी उसे बिना बताये गायब हो गयी।

अन्जान इलाके में अकेली इस मासूम बच्ची का कोई जानने वाला नहीं था। मकान मालकिन ने फिर रुबी को अपनी बेटी और दामाद त्रिलोकी अग्रवाल के यहां भेज दिया जो महराजगंज जिले के भारत नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवां कस्बे में रहते थे। वहां इस मासूम बच्ची को एक साल तक बन्धक बनाकर रखा गया। बात- बात पर मारा पीटा जाता था और भरपेट खाने को भी नहीं दिया जाता था। इस मासूम का दर्द जिसने भी सुना उसकी आंखे भर आयी।

रुबीलाला कई बार घर से भागने की कोशिश भी की लेकिन नहीं निकल पायी। 17 मार्च 2018 को एक बार फिर उसकी बेरहमी से पिटाई की गयी। इस बार वह घर से भाग निकली और पड़ोसी के घर में छुप गयी। रुबीलाल ने पड़ोसी को पूरी दास्ता सुनाई तो उन्होंने रुबीलाला को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस इसे अपने साथ ले गयी और चाइल्डलाइन को सौंप दिया। महराजगंज जिले के चाइल्डलाइन के लोगों ने चार दिन में इस मासूम के परिजनों को ढूढ़ निकाला।

इधर रुबीलाला के परिजन भी उसकी तलाश में जुटे हुये थे। जिला बाल कल्याण समिति के माध्यम से रुबीलाला के दादा और दादी से सम्पर्क किया गया। जिला बाल कल्याण समिति के कार्यालय में 19 माह बाद जब रुबी लाला अपने दादा,दादी, चाचा और ताऊ से मिली तो लिपटकर रोने लगी। यह नजारा देख सभी की आंखे नम हो आयी।

जिला बाल कल्याण समिति ने सबूत पुख्ता होने पर मासूम रुबीलाला को उसके दादी और बाबा को सौंप दिया। रुबीलाला की इस दुखभरी दास्तां इस समाज कलिये एक आइना है जिसमें गुनहगार सिर्फ पराये ही नही होते बल्कि वे मां-बाप भी होते है जो अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते है।

Story Loader