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छात्रा की जलने से हुई थी मौत, हत्या और आत्महत्या की गुत्थी में उलझी पुलिस

जनपद में बहुचर्चित शारदा पब्लिक स्कूल की छात्रा को जिंदा जलाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

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बलरामपुर. जनपद में बहुचर्चित शारदा पब्लिक स्कूल की छात्रा को जिंदा जलाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कक्षा आठ में पढ़ने वाली मेघावी छात्रा निकिता की विद्यालय परिसर में ही जलने से मौत हो गई। रसूखदारों के प्रभाव में घटना के 14 दिन बाद भी पुलिस हत्या और आत्महत्या की गुत्थी में उलझी हुई है। दो अज्ञात पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराने वाली मां भी अब दबाव के चलते बेटी की आत्महत्या की बात कर रही है। घटना में पुलिस की कार्यशैली भी संदेह के घेरे में है।

अज्ञात लोगों ने निकिता को किया आग के हवाले

नगर के शारदा पब्लिक स्कूल के कक्षा आठ में पढ़ने वाली छात्रा निकिता की दो अक्टूबर गांधी जयन्ती की रात विद्यालय परिसर में स्थित आवास में संदिग्ध परिस्थिति में 90 प्रतिशत जल गई। निकिता जब घर के आंगन में स्थित बाथरूम गई थी तब अज्ञात लोगों ने निकिता पर तेल डालकर उसे आग के हवाले कर दिया। आग लगने के बाद जब निकिता चिल्लाई तब उसकी मां और परिसर में मौजूद लोग उसे बचाने के लिए दौड़े, लेकिन तब तक निकिता 90 प्रतिशत तक जल चुकी थी। सभी ने मिलकर आग को बुझाया और निकिता को लेकर जिला मेमोरियल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। निकिता की हालत गम्भीर होने पर डॉक्टर ने उसे फौरन ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। ट्रामा सेंटर में केस न लिए जाने पर उसे पास के ही एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। सात अक्टूबर को हिम्मत से जिन्दगी और मौत के बीच लड़ रही जंग निकिता हार गई और उसकी मौत हो गई।

मां के कहने पर दो अज्ञात का लिया नाम

निकिता की मां शारदा पब्लिक स्कूल के प्रबंधक पराग बोस के भाई आरके बोस के घर परिवार की तरह रहकर कई सालों से काम करती हैं और उनकी बेटी उसी स्कूल में कक्षा आठ की छात्रा थी। दोनों मां बेटी स्कूल परिसर में बने आवास में आरके बोस के परिवार के साथ रहते थे। 25 अक्टूबर को परीक्षा समाप्त होने के बाद निकिता आर.के. बोस व उनकी पत्नी के साथ दशहरा की छुट्टी मनाने उनके रिश्तेदार के घर गोरखपुर गई थी और दो अक्टूबर की रात वापस लौटे थे जिसके कुछ देर बाद ही ये घटना हो गई। घटना के दो दिन बाद चार अक्टूबर को पीड़िता की मां की तहरीर पर कोतवाली नगर में दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया लेकिन स्कूल प्रबंधन के दबाव में मां अब अपने ही बेटी की आत्महत्या की बात कर रही है। निकिता की मां सुनीता का कहना है कि उसने ही निकिता को दो अज्ञात का नाम लेने को कहा था।

मौजूद थे चार लोग

पूरे वारदात में निकिता की मौत को लेकर कई सवाल भी खड़े होते है। निकिता की मां की माने तो जब निकिता जल रही थी तो उसके शरीर में लगी आग को बुझाने के लिए पानी डाला गया जबकि पानी डालने से आग लगे इंसान की हालत और खराब हो गई और ऐसी क्या जरूरत पड़ी कि खुद मां ने बेटी को दो अज्ञात का नाम लेने के लिए कहा जबकि घर के जिस आंगन में निकिता जली है वहां पर बाहर से किसी का पहुंचना मुमकिन नहीं है। वो भी तब जब घर की सुरक्षा में दो खतरनाक कुत्ते लगे हों। गोरखपुर से निकिता दशहरा की छुट्टी मनाकर जब वापस आई तो वो काफी खुश थी। तो ऐसा क्या हो गया कि उसके लौटने के तुरन्त बाद अपने उपर डीजल छिड़कर आग लगा ली। जिस वक्त घटना हुई उस वक्त आवास पर चार लोग मौजूद थे। पहला आर.के. बोस, दूसरा आर.के. बोस की पत्नी, तीसरा निकिता की मां सुनीता और चौथी खुद निकिता।

सहेलियों ने निकिता को न्याय दिलाने की मांग की

शारदा पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर पराग बोस के भाई आर.के बोस की माने तो उन्होंने गोरखपुर से लौटने के बाद दो अक्टूबर को उन्होंने निकिता को पढ़ाई में गम्भीर रहने के लिए डांटा था। लेकिन सवाल ये है कि जब निकिता अपने क्लास की सबसे मेघावी छात्रा थी व स्कूल के हर एक्टीविटी में हिस्सा लेकर अव्वल रहती थी और जब अभी 25 अक्टूबर को विद्यालय की परीक्षा समाप्त हुई थी तो पढ़ाई के लिए प्रेशर क्यों दिया गया। या फिर ऐसा बयान देकर घटना को हत्या से आत्महत्या की ओर मोड़ने की साजिश की जा रही है। कुछ भी हो निकिता अपने स्कूल की सबसे मेघावी छात्रा थी और पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी अव्वल रहती थी। निकिता की अचानक जलने के बाद मौत की खबर ने उसके साथ में पढ़ने वाली छात्राओं को भी सदमें में डाल दिया। निकिता की सहेलियों ने प्रशासन से निकिता को न्याय दिलाने की मांग की है।

घटना को लेकर लोगों में है आक्रोश

पूरे मामले में मां की तहरीर के बाद पुलिस शुरू से ही निकिता को जिंदा जलाए जाने की बात कर रही थी। लेकिन 7 अक्टूबर को निकिता की मौत के बाद 13 अक्टूबर को जब निकिता की मां सहित सभी लोग वापस आवास पर पहुंचे तो उसके सुर बदले हुए थे वो अब हत्या की जगह आत्महत्या किए जाने की बात कर रही थीं। पुलिस की भूमिका भी पूरे घटनाक्रम में संदिग्ध बनी हुई है। जब पहले दिन से पुलिस को पता है कि निकिता की हत्या हुई या उसने आत्महत्या की तो घटना के चौदह दिन बाद भी पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा क्यों नहीं कर रही है। घटना को लेकर बलरामपुर के लोगों में आक्रोश है। कई सामाजिक संगठन और राजनैतिक दल भी प्रदर्शन कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

निकिता की हत्या हुई है या फिर उसने आत्महत्या की है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन एक बात तो पक्की है कि निकिता के आत्महत्या करने के पीछे भी कोई वजह जरूर रही होगी जिसको दबाने का प्रयास पुलिस कर रही है। घटना के 14 दिन बाद भी घटना का खुलासा न होना भी पुलिस प्रशासन पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।