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संवेदनहीन बना स्वास्थ्य विभाग, एचआईवी मरीज को जांच के बाद लिटाया जमीन पर

बलरामपुर में स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही और संवेदनहीनता किसी से छिपी नहीं है।

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संवेदनहीन बना स्वास्थ्य विभाग, एचआईवी मरीज को जांच के बाद लिटाया जमीन पर

बलरामपुर. बलरामपुर में स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही और संवेदनहीनता किसी से छिपी नहीं है।चर्चा में रहने वाला स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। डॉक्टरों की संवेदनहीनता के चलते जिला मेमोरियल अस्पताल सुर्ख़ियों में है। मेमोरियल अस्पताल में एचआईवी पाॅजिटिव गरीब मरीज के साथ संवेदनहीनता और भेदभाव करने का मामला सामने आया है।

जिला मेमोरियल चिकित्सालय में मेडिकल वार्ड के पास एक एचआईवी पाॅजिटिव मरीज गम्भीर अवस्था में फर्श पर पड़ा था। पूछने पर पता चला कि डाक्टर को दिखाने के बाद करीब दो घंटे से वो फर्श पर पड़ा है। अस्पताल में बेड खाली होने के बावजूद मरीज को बेड नहीं दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं डाक्टर ने मरीज को दवा देने से पहले जांच के लिए लिखा लेकिन उसकी जांच अस्पताल में नहीं की गई जिसके कारण मरीज को करीब 1200 रूपये खर्च कर जांच प्राइवेट पैथालाॅजी पर करवानी पड़ी। मरीज के गरीब व अनपढ़ परिजनों को ठीक से ये तक नहीं पता कि उसे हुआ क्या है और मरीज के साथ क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और उसके इलाज की सरकारी व्यवस्था क्या हैं। पैसा ना होने पर परिजनों ने गांव में कुछ दिनों तक मरीज का इलाज कराया और जब तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल लेकर पहुंचे।मरीज के परिजन ने बताया कि डॉक्टर ने HIV होने की बात बताइ है। कई सारे जांच करवाएं है वो भी बाहर से लेकिन अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। मरीज को फर्श पर लिटाया है क्योंकि अस्पताल में बेड नहीं दिया गया है और न ही भर्ती किया है।

मामला सामने आने पर मरीज की जांच करने वाले चिकित्सक और अस्पताल के सीएमएस सफाई देने लगे। सीएमएस तो फर्श पर पड़े मरीज को लेकर मीडिया पर ही भड़क गये और मीडिया से ही सवाल जवाब करने लगे। जिला मेमोरियल चिकित्सालय के चिकित्सक डा. अजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि हमारे यहां एफआरटी में 15 दिनों से उसका इलाज चल रहा है। तबीयत ज्यादा खराब हो गई है। जांच रिपोर्ट आने पर जरूरत पड़ी तो भर्ती किया जाएगा नहीं तो दवा देकर घर भेज दिया जाएगा।

जिला मेमोरियल चिकित्सालय, बलरामपुर के सीएमएस डा. एस.एच.आई. जैदी ने अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए तो मीडिया पर भड़क उठे और उल्टे मीडिया से ही सवाल करना शुरू कर दिया और पूछा कि मरीज फर्श पर क्यों पड़ा है उसे डाक्टर के पास जाना चाहिए, लावारिस है क्या, लावारिस नहीं है तो उसके साथ वाले क्या कर रहे हैं। फर्श पर क्यों लेट गया, कोई डाक्टर व कर्मचारी फर्श पर लेटाएगा नहीं और असपताल में बेड की कमी नहीं है।

2017 में एचआईवी और एड्स के निःशुल्क इलाज व बचाव के लिए केन्द्र सरकार ने बिल पास किया था जिसके अन्तर्गत एचआईवी पाॅजीटिव पाये जाने पर पहले दिन से मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाएगा। एचआईवी मरीजों का इलाज मुफ्त होगा और इसका खर्च केन्द्र सरकार उठाएगी। एचआईवी मरीजों के साथ भेदभाव करने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में भी रखा गया है। लेकिन तमाम सरकारी दावों पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मामला सामने के बाद एसीएमओ डा. जयन्त कुमार ने बताया कि मामला बेहद सेंसटिव और गम्भीर है। एचआईवी पाॅजिटिव मरीज को फर्श पर लिटाने और उसकी प्राइवेट जांच करवाने के मामले में जांच कराकर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।