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महाराजा बलरामपुर सर धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन, शोक की लहर

राजपरिवार के मुखिया व बलरामपुर स्टेट के महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का दिल का दौरा पड़ने के कारण आकस्मिक निधन हो गया है।
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बलरामपुर

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Akansha Singh

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Updated: 30 Jul 2018, 7:43 AM IST

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महाराजा बलरामपुर सर धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन, शोक की लहर

बलरामपुर. राजपरिवार के मुखिया व बलरामपुर स्टेट के महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का दिल का दौरा पड़ने के कारण आकस्मिक निधन हो गया है। महाराज के निधन की खबर से पूरे बलरामपुर में शोक की लहर दौड़ गयी। महाराज का पार्थिव शरीर बलरामपुर स्थित उनके महल नीलबाग पैलेस लाया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह अपने साढू राजा उवेल के घर पारिवारिक समारोह में भाग लेने गोमतीनगर, लखनऊ स्थित उनके घर गए हुए थे। दोपहर का भोजन करने के बाद कुछ आवश्यक कार्य से गोमती नगर बाजार के निकले हुए थे। इसी दौरान अचानक दिल का दौरा पड़ गया। वहां मौजूद सहयोगियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्राप्त सूचना के अनुसार सोमवार की सुबह उनका पार्थिव शरीर बलरामपुर लाया जा सकता है। महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का जन्म गोंडा जिले के गंगवल स्टेट के राजा कुंवर भरत सिंह के घर वर्ष 1958 में हुआ था। बलरामपुर के महाराज सर पाटेश्वरी प्रसाद सिंह की कोई संतान न होने के कारण उन्होंने धर्मेंद्र प्रसाद सिंह को गोद ले लिया था। वर्ष 1964 में महाराजा सर भगवती प्रसाद सिंह के स्वर्गवास के बाद धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का राजतिलक कर उन्हें महाराज घोषित कर दिया गया था और तब से अब तक बलरामपुर स्टेट उन्हीं के अधीन था। महाराजा धर्मेंद्र प्रसाद सिंह के एक पुत्र कुंवर जयेंद्र प्रताप सिंह और एक पुत्री कुंवर विजय श्री हैं।

महाराज सर धर्मेंद्र प्रसाद सिंह का विवाह 1980 में नेपाल के जंग बहादुर राणा की पुत्री महारानी वंदना राजलक्ष्मी के साथ हुआ था और 29 दिसंबर 1980 में उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम जयेंद्र प्रताप सिंह रखा गया। 21 अप्रैल 1984 में पुत्री महाराज कुंवर विजय श्री का जन्म हुआ। जैसा कि सर्वविदित है कि बलरामपुर स्टेट धार्मिक कार्यों में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता रहा है। स्कूल अस्पताल तथा मंदिर सैकड़ों की संख्या में निर्माण करा कर सार्वजनिक कार्यों में हमेशा आगे रहा है। महाराज की मृत्यु की खबर आते ही बलरामपुर वासियों में शोक की लहर दौड़ गई है और लोग उनके पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए सुबह होने का इंतजार कर रहे हैं।