
गर्भवती महिलाएं ऐसे रखें नवरात्रि का व्रत, बच्चे पर नहीं पड़ेगा कोई असर
बलरामपुर. 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव नवरात्र की शुरुआत मां दुर्गा की पूजा और व्रत से होती है। इस दौरान घर के ज्यादातर सदस्य 9 दिनों का उपवास रखते हैं और दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं लेकिन यदि घर में कोई गर्भवती महिला है तो उसे पूरा दिन खाली पेट रहने से परहेज करना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि इस अवस्था में आप उपवास बिल्कुल ना रखें लेकिन बेहतर होगा कि आप कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। ताकि आपको और आपके गर्भ में पल रहे शिशु को दिन भर भूखे पेट रहने की वजह से किसी प्रकार की दिक्कत या परेशानी ना हो। गर्भ में पल रहे शिशु को नियमित रूप से पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है जो वह आपके द्वारा लिए गए आहार से ही प्राप्त करता है। नवरात्र के दौरान व्रत रखना चाहती हैं तो जरूर रखिए पर इस दौरान कुछ बातों का ध्यान विशेष तौर पर रखिए। आज आपको फर्क है पर बलरामपुर की रहने वाली हैल्थ एक्पर्ट रीना चौधरी बताएंगे कि गर्भवती महिलाओं को नवरात्रों में कैसे व्रत रखना चाहिए...
शरीर में पानी की कमी ना होने दें
यूं तो हम सभी को एक पूरे दिन में औसतन 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन गर्भावस्था में व्रत के दौरान पानी पीते रहने से काम नहीं चलता है। इसलिए पानी के साथ साथ साथ छाछ, मिल्क शेक, नारियल पानी, शिकंजी और वेजिटेबल्स स्मूदी को अपने आहार में शामिल करें।
अनाप-शनाप खाने से बचें
माना कि आपके लिए पूरे दिन में थोड़े थोड़े समय के अंतराल पर कुछ न कुछ खाना आवश्यक है लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि आप बाजार में मिलने वाला व्रत में खाने योग्य स्नैक्स दिन भर खाती रहें। यदि लंबे समय तक खाली पेट रहना है तो आपके लिए नुकसानदायक है तो बिना सोचे समझे कुछ भी खाते रहना फायदेमंद नहीं है।
नमक की कमी ना होने दें
व्रत के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखें कि सिर्फ आप मीठे पर निर्भर नहीं रहे। इस बात का ध्यान रखें कि शरीर में नमक की भी कमी से चक्कर आना और बेहद कमजोरी जैसी दिक्कतें होने लगती है। इसलिए आप चाहे तो सेंधा नमक ही क्यों न खाएं, लेकिन उसको आहार में जरूर शामिल करें।
खानपान में इन बातों का भी रखें ध्यान
- अपने आहार में मौसमी फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें।
- दही, रायता, छाछ या लस्सी का नियमित सेवन करें।
- आप खीरा भी खा सकती है क्योंकि इसमें गर्भावस्था के लिए जरूरी खनिज लवण होते हैं।
- शकरकंद खाएं, यह बेटाकैरोटीन आयरन और फाइबर से भरपूर होता है जो पोषण देने के साथ साथ लंबे समय तक पेट भी भरा रखता है।
- बादाम, अखरोट और किशमिश रात में भिगो दें और सुबह नाश्ते में एक गिलास दूध के साथ खा लें।
- साबूदाना हल्का और सुपाच्य होता है इसलिये इसकी खिचड़ी बनाकर खाएं।
- सामक के चावल अपने आहार में शामिल करें। यह खनिज लवणों और विटामिन से भरपूर होता है। आप सामक के आटे की रोटी भी खा सकती हैं।
- व्रत के दौरान चौलाई का सेवन विशेष रूप से किया जाता है क्योंकि इसमें मौजूद मैग्नीशियम मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और इसमें मौजूद अन्य पोषक तत्व होने वाले शिशु को फायदा पहुंचाते हैं पर इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करें।
- कुट्टू और सिंघाड़े का आटा विशेष रूप से खाया जाता है। इसमें विटामिन बी, विटामिन सी, कैलशियम, आयोडीन फास्फोरस और मैग्नीशियम पाया जाता है। वही कुट्टू के आटे में प्रोटीन एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर प्रचुरता में होता है इन्हें अपने फलाहार में शामिल करें।

Published on:
09 Oct 2018 08:08 am

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