
बांदा की राधा ने UPSC के पहले अटेंप्ट में ही 7वीं रैंक हासिल की है।
जब हौसले बुलंद हो तो सफलता भी निश्चित कदम चूमती है। यह करिश्मा बुंदेलखंड के एक किसान परिवार की बेटी ने कर दिखाया। जिसने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। इस सफलता पर परिवार के साथ-साथ पूरा गांव गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
राधा के पिता ने 22 साल पहले छोड़ दिया था घर
मूल रूप से बांदा जनपद की देहात कोतवाली क्षेत्र के पचनेही गांव के रहने वाले किसान अनिल अवस्थी बताते हैं कि उनके एक बेटा और तीन बेटियां हैं। उनकी पत्नी एमए किए है लेकिन हाउस वाइफ है। बच्चों का भविष्य बनाने के लिए उन्होंने 22 साल पहले यानी कि 2001 में घर छोड़ दिया था। फिर लखनऊ में एक किराए के मकान में रहकर बच्चों को पढ़ाया लिखाया।
राधा ने पहले अटेंप्ट में एग्जाम किया क्रैक
जितनी लगन से राधा के पिता बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे रहे थे। बेटी भी उतनी ही मेहनती निकली। राधा ने अपनी स्कूलिंग से लेकर बीएससी तक की पढ़ाई लखनऊ से की। इसके बाद केंद्रीय विद्यालय सागर से एमटेक किया। इसी दौरान उसने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। और राधा की मेहनत रंग लाई। पहले अटेंप्ट में ही यूपीएससी जियो-साइंटिस्ट एग्जाम क्रैक कर लिया है।
सभी बच्चे हो गए कामयाब
बुंदेलखंड के किसान अनिल अवस्थी के तीनों बच्चे कामयाब हो गए। बेटा इंजीनियर, एक बेटी लेक्चरर, दूसरी बैंक मैनेजर है और अब तीसरी बेटी राधा ने यूपीएससी क्रैक किया है। राधा अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देती है।
Published on:
17 Jan 2024 06:15 am
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