
बांदा. जिले में सरकारी डॉक्टरों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है, पैसे न देने पर इलाज न करने से हुई मासूम की मौत मामले को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि बांदा जिला अस्पताल में एक बार फिर डॉक्टरों की संवेदनहीनता का नजारा देखने को मिला है। जहां एक घायल महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था।डॉक्टर ने उसका इलाज करने के बजाय उससे मुकदमा न दर्ज करने पर ही ईलाज देने की बात करने लगे। परिजनों की सूचना पर खुद एसपी अस्पताल पहुंच गई, उनकी डांट फटकार के बाद ही महिला का इलाज शुरू हो सका।
दरअसल बबेरू कसबे में एक महिला के पति ने शराब के नशे में उसे मारपीट कर छत से नीचे फेंक दिया था । जिसके बाद महिला को घायल अवस्था में बबेरू सीएचसी में भर्ती कराया गया तथा गंभीर हालत को देखते हुए उसे बांदा ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया था।
गंभीर हालत में महिला को पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने महिला मरीज के साथ आये तीमारदारों से इलाज करने से यह कहते हुए मना कर दिया कि अगर पुलिस से शिकायत करोगे तो इलाज नहीं होगा। साथ आये पुलिसकर्मियों ने जब इसकी सूचना एसपी को दी, तब एसपी तुरंत ट्रामा सेंटर पहुंची व महिला के परिजनों से इलाज की जानकारी ली, इसके बाद एसपी शालिनी का पारा सातवें आसमान में पहुंच गया । एसपी शालिनी ने मौके पर पहुंच इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर को जमकर लताड़ा और मुख्य चिकित्साधिकारी को इसकी सूचना दी, तब जाकर कहीं महिला को इलाज मिल सका । पुलिस अधीक्षक शालिनी ने बताया कि घायल महिला बबेरू सामुदायिक केंद्र से रिफर होकर बांदा जिला अस्पताल लायी गयी थी, जहां डॉक्टरों ने यह कहते हुए इलाज से मना कर दिया कि अगर पुलिस मुकदमा करोगे तो इलाज नहीं करेंगे, इसपर वह मौके पर गयी और इसके लिए फटकार लगाई तब जाकर इलाज शुरू हुआ । वहीं इस मामले में जब मुख्य चिकित्साधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने पूरे मामले की लीपापोती करते हुए अस्पताल के डॉक्टरों को क्लीन चिट ही दे दी । सीएमएस का कहना था कि पहले गंभीर मरीज़ों को देखा जाता है और नंबर से इलाज किया जाता है ।
Published on:
21 Apr 2018 12:37 pm
