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मंत्री पद के लिए कांग्रेस के 10 दावेदार आए

विधान परिषद के सदस्यों ने ठोका दावा

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jaymala

मंत्री पद के लिए कांग्रेस के 10 दावेदार आए

परिषद के सदस्यों की अनदेखी से नाराजगी

बेंगलूरु. गठबंधन सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए कांग्रेस के 10 वरिष्ठ विधान परिषद सदस्यों ने दावेदारी की है। विधान परिषद के सदस्य वी.एस. उग्रप्पा ने तर्क दिया है कि केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल के 76 विभागों में से वित्त, सुरक्षा, रेलवे समेत 20 विभाग राज्यसभा सदस्यों को सौंपे गए हंै। महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में 9, बिहार में 7 विधान परिषद सदस्य मंत्रिमंडल में शामिल हंै। लेकिन राज्य में सत्तासीन कांग्रेस के विधान परिषद सदस्यों की अनदेखी की जा रही है।

राज्य सरकार में एक मात्र विप सदस्य जयमाला को शामिल किया गया है। जबकि विप में प्रशासनिक अनुभव वाले कई सदस्य मौजूद हैं। वे चाहते हैं कि मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान विधान परिषद के वरिष्ठ सदस्यों को शामिल किया जाए। मंत्री बनने के लिए दावेदार विप सदस्यों में एस.आर. पाटिल, अल्लम वीरभद्रप्पा, एच.एम. रेवण्णा, वी.एस. उग्रप्पा, सी.एम. इब्राहिम, के.सी. कोंडय्या, आर.बी. तिम्मापुर एआइसीसी के महासचिव बोसराजू, धर्मसेना तथा आईवन डिसूजा शामिल हैं।

सदन की नेता जयमाला से नाराजगी
जयमाला को मंत्री बनाने से सदन के वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य नाराज हैं। हाल में संपन्न हुए सत्र में इन सदस्यों ने सदन की नेता जयमाला का अघोषित बहिष्कार भी किया था। इससे पहले हर स्थिति में सरकार के बचाव में उतरने वाले वी.एस. उग्रप्पा, एच.एम. रेवण्णा तथा अन्य सदस्यों ने जयमाला को विपक्ष के सवालों से बचाने का कोई प्रयास नहीं किया था। सदन के वरिष्ठ नेता चाहते हंै कि वरिष्ठ नेता को मंत्रिमंडल में शामिल कर उसे सदन के नेता की जिम्मेदारी सौंपी जाए।


विप का विशेष सत्र बुलाने की मांग
सभापति तथा उपसभापति के चयन का मामला
बेंगलूरु. विधान परिषद के सभापति, उप सभापति तथा सरकारी सचेतक के चयन के लिए वरिष्ठ विधान परिषद सदस्यों ने विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। इस मांग को लेकर विप के कांग्रेस सदस्यों ने हाल में मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के साथ मुलाकात की है। गठबंधन सरकार के पहले सत्र के दौरान राज्यपाल ने विधान परिषद के लिए कार्यवाहक सभापति के रूप में बसवराज होरट्टी को नियुक्त किया था। इस सत्र के दौरान कार्यवाहक सभापति के अधिकार को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था। सत्र के दौरान भाजपा ने विधान परिषद के लिए सभापति तथा उपसभापति का चुनाव कराने की मांग रखी थी। विपक्ष की इस मांग पर संसदीय मामलों के मंत्री कृष्णा बैरेगौड़ा ने सदन को अगला सत्र शुरू होने से पहले सभापति तथा उपसभापति का चयन करने का आश्वासन दिया था।

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