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खतरे के बीच राहत बनी 104 आरोग्य वाणी हेल्पलाइन

तीन दिन में 87 लोगों ने किया संपर्कतीन संदिग्ध मरीज की पहचान

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nipah

खतरे के बीच राहत बनी 104 आरोग्य वाणी हेल्पलाइन

बेंगलूरु. निपह वायरस के खतरे के बीच '104 आरोग्य वाणी' हेल्पलाइन राहत बनी है। बीते तीन दिन में प्रदेश के 28 जिलों से 87 लोगों ने परामर्श लिया है। इनमें तीन संदिग्ध मरीजों की पहचान भी हुई है। तीनों के कंठ स्राव व रक्त नमूनों को निपह वायरस जांच के लिए भेजा गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा निदेशालय में सूचना, शिक्षा एवं संचार विभाग के कार्यवाहक संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश शास्त्री ने बताया कि 22-24 मई के बीच 87 लोगों ने 104 पर संपर्क किया। गुरुवार को 32 लोगों ने कॉल किया था। इनमें से तीन लोगों के लक्षण निपह वायरस से मिल रहे थे। एक मरीज शिवमोग्गा, दूसरा दक्षिण कन्नड़ और तीसरा गदग जिले से हैं। तीनों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है। शिवमोग्गा, रायचूर, बेंगलूरु (ग्रामीण), बल्लारी और चित्रदुर्गा से सर्वाधिक कॉल आए।

कटे फल बेचने पर रोक
बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने निपह के कारण एहतियाती कदम उटाते हुए कब्बन पार्क में फल और कटी हुई चीजों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। महापौर संपतराज ने पत्रकारों को बताया कि कई लोगों ने उनसे भेंट कर बताया है कि कब्बन पार्क में बांस और अन्य पेड़ होने के कारण वहां अधिक संख्या में चमगादड़ हैं। वह शाम होते ही उडऩे लगते हैं। कब्बन पार्क के अंदर और बाहर कटे फल और चीड़ों की बिक्री होती है। उसी कारण वहा बिक्री पर प्रतिबध लगाने की मांग की।

महापौर ने लोगों के साथ कब्बन पार्क का दौरा किया। वहां बांस और अन्य पेड़ों पर चमगादड़ देखे। कब्बन पार्क के छह द्वाराों के पास कटे फलों औरअन्य चीजों की बिक्री होती है। फलों के छिलके और फेंके गए भोजन को खाने चमगादड़ आते हैं। पालिका और स्वास्थ्य विभाग के जरिए निपह वायरस की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हंै।

उन्होंने कहा कि कब्बन पार्क, लाल बाग, बसवनगुड़ी के ब्यूगल पार्क, कृष्णय्या पार्क समेत अन्य कई उद्यानों के बाहर कटे फल बेचे जाते हैं। इस तरह के कटे फल नहीं खाने के के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। चमगादड़ों से अन्य जानवरों और पक्षियों के लिए भी वायरस लगने की संभावना से अधिक परेशानी होने लगी है। हडसन सर्कल से कब्बन पार्क के प्रवेश द्वार के बाएं तरफ पेड़ों में अधिक संख्या में चमगादड़ दिखाई देते हैं। इसके पास ही कटे फलों को बिक्री होती है। इसके अलावा हापकॉम्स की दुकान भी है। वहां जूस भी बेचा जाता है।

ड्रोन से गिने चमगादड़
महापौर ने बताया कि ड्रोन के जरिए चमगादड़ की संख्या का पता लगाया है। कब्बन पार्क में कम से कम पांच हजार चमगादड़ हैं। इतनी ही संख्या में बसवनगुड़ी के ब्यूगल पार्क में है। यहां शाम होते ही फूड स्ट्रीट और मोबाइल कैंटीन आरंभ होते हैं। बड़ी संख्या में बच्चे आते हैं। पालिका के अंतर्गत 700 से अधिक उद्यान हैं। यहां बड़े पेड़ होने के कारण चमगादड़ो़ के लिए रहने का ठिकाना मिला है। साथ ही कब्बन पार्क में सात कुएं हैं इन कुओं से पक्षियों को पानी उपलब्ध हो रहा है। नागरिकों को इन कुएं का पानी इस्तेमाल ना करने से संबंधित वहां नोटिस बोर्ड लगाए गए हैं। पालिका के अंतर्गत सभी उद्यानों के बाहर कटे फल बेचने पर कार्रवाई होगी।

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