
एक ही गांव के 46 लोगों को फाइलेरिया
यादगिर. राष्ट्रीय मच्छर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार ने देश को फाइलेरिया यानी हाथी पांव बीमारी से मुक्त कराने के लिए 2020 का लक्ष्य रखा है।
लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रदेश के एक गांव में कुछ ज्यादा नहीं कर सका है। समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगया जा सकता है कि जिले के मोटनाहल्ली गांव में 46 लोग फाइलेरिया से पीडि़त हैं।
इनमें 16 महिलाएं और 30 पुरुष हैं। इस गांव के हर परिवार में फाइलेरिया के एक या दो मरीज हैं। गांव की आबादी 3970 (1986 पुरुष और 1984 महिलाएं) है। 3970 लोगों में से फाइलेरिया के 150 संदिग्ध मरीज मिले थे।
हालांकि, हर संभव प्रयासों का दावा कर रहे स्वास्थ्य विभाग ने गांव वालों की इस स्थिति का ठीकरा उन्हीं के सिर फोड़ा है। विभाग के अनुसार लोग दवा लेने में कोताही बरत रहे हैं जिसके कारण संक्रमण फैल रहा है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सूर्यप्रकाश के अनुसार स्वास्थ्य विभाग गत 13 वर्ष से डीइसी नामक दवा लोगों को लगातार उपलब्ध कराता आ रहा है। इसके सेवन से फाइलेरिया के कीटाणु शरीर में ही मर जाते हैं।
लेकिन लोग इसका सेवन नहीं कर रहे हैं। लोगों के अनुसार डीइसी के नियमित सेवन के बावजूद अन्य लोग संक्रमित हो रहे हैं। फाइलेरिया के फैलने का कारण पता लगाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना व उत्तर प्रदेश के चार जिलों का चयन किया था।
कर्नाटक का यादगीर जिले के आठ हजार से ज्यादा लोगों के रक्त के नमूने लिए थे। मच्छर जनित बीमारी नियंत्रण अनुसंधान केंद्र (वीसीआरसी) ने यादगीर के हट्टीकुनी गांव में तीन माह तक अध्ययन कर रिपोर्ट जारी की।
वीसीआरसी के वैज्ञानिक आर. विजेश के अनुसार फाइलेरिया के मामले लगातार बढ़ रहे थे। लेकिन इसका सकारात्मक पहलू यह है कि वर्ष 2004 के मुकाबले इस वर्ष प्रदेश के अन्य हिस्सों में मरीज की संख्या में कुछ कमी आई है।
वर्ष 2004 में देश भर में किए गए अध्ययन के अनुसार कर्नाटक में माइक्रो फाइलेरिया की दर 1.98 फीसदी थी।जो मौजूदा वर्ष में घटकर 1.19 फीसदी तक पहुंची।
कैसे होता है फाइलेरिया
फाइलेरिया मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर फ्लूलेक्स एवं मैनसोनाइडिस प्रजाति के होते हैं। काटने के दौरान मच्छर एक धागे समान परजीवी को शरीर में छोड़ता है।
इस रोग का संक्रमण सामान्यतया बचपन में ही होता है। बीमारी वर्षों बाद सामने आती है। इस बीमारी में टांगों, हाथों, अंडकोश एवं शरीर के अन्य भागों में अत्यधिक सूजन होने लगती है। मगर बाद में यह सूजन स्थायी और लाइलाज हो जाती है।

Published on:
14 Nov 2018 08:29 pm
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