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10 दिन में 53 घंटे चली विधानसभा

राज्यपाल के अभिभाषण पर दोनों सदनों में 16 घंटे चर्चा

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10 दिन में 53 घंटे चली विधानसभा

बजट अधिवेशन

बेंगलूरु. दस दिवसीय बजट सत्र में विधानसभा में कुल 53 घंटे 5 मिनट की कार्यवाही हुई। विधानसभा सचिवालय के सचिव एन.मूर्ति के अनुसार इस सत्र में धन विनियोग विधेयक समेत 5 विधेयक पारित किए गए।
सत्र के पहले दिन राज्यपाल वजुभाई वाळा ने विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित कर इस सत्र का आगाज किया। राज्यपाल के भाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर दोनों सदनों में 16 घंटे 26 मिनट बहस चली। दोनों सदनों में मुख्यमंत्री एच.डी.कुमारस्वामी ने इस बहस का जवाब दिया।
विधानसभा में सत्र के लिए 747 प्रश्न स्वीकृत किए गए। इनमें से 32 सदस्यों के 27 प्रश्न तारांकित प्रश्नों की सूची में शामिल हुए। इनमें से 29 प्रश्नों का उत्तर दिया गया। अन्य 3 प्रश्नों के उत्तर के लिए राज्य सरकार ने अधिक समय की मांग रखी। 646 गैरतारांकित सवालों में से 537 सवालों का लिखित जवाब सदन की पटल पर रखा गया।
नियम 73 के तहत सदन में 123 सूचना पत्र स्वीकृत किए गए। इनमे से 73 सूचनाओं का सरकार की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है। नियम 351 के तहत 58 सूचनाएं स्वीकृत कर इनमें से 32 सूचनाओं का सदस्यों को जवाब दिया गया। नियम 69 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत 3 सूचनाएं स्वीकृत की गई तथा इन तीनों सूचनाओं पर सदन में बहस के पश्चात सरकार की ओर से इस बहस का जवाब दिया गया। विधानसभा में शून्यकाल के दौरान लाए गए 8 मामलों पर सरकार की ओर से स्पष्टिकरण दिया गया। कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन किसानों की 44 हजार 700 करोड़ रुपए की ऋणमाफी की घोषणा इस सत्र की एक खासियत रही।
धनविनियोग, निजी क्षेत्र के विवि संशोधित विधेयक समेत सत्र में पांच विधेयक ध्वनिमत से पारित किए गए।सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में राज्य के नशीले पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने की मांग के साथ लाए गए भाजपा विधायक आर.अशोक के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के बहस में 10 सदस्यों ने भाग लिया। विधान परिषद में कार्यवाहक सभापति की वैधता को लेकर तीन घंटों तक बहस चली। भाजपा की तारा अनुराधा की वनवासियों के अधिकारों को लेकर लाए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव की सदन के सभी सदस्यों ने सराहना की। राज्यपाल के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान भाजपा के सदस्य लहरसिंह के कांग्रेस पर किए गए कटाक्ष के कारण सदन में हंगामा हुआ था।
सत्र के अंतिम दिन विधान परिषद में अल्पसंख्यक तथा वक्फ मामलों के मंत्री जमीर अहमद खान विपक्ष के जाल में फंस कर सीबीआइ जांच करने के लिए सरकार तैयार होने का बयान देकर फंस गए। हालांकी जमीर अहमद खान ने बयान देने के पश्चात पल्ला झाडने का प्रयास किया लेकिन तब तक उनका बयान विप की कार्यवाही में शामिल हो गया था। कांग्रेस के कई वरिष्ठ सदस्यों नें जमीर अहमद खान के आनन-फानन दिए गए इस बयान पर नाराजगी व्यक्त की थी।