
बेंगलूरु. गणेशबाग स्थानक में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी विजयलता ने दसवैकालिक सूत्र के तृतीय अध्ययन का विश्लेषण करते हुए कहा कि संसार के समस्त प्राणियों में मानव श्रेष्ठ है। सभी मानवों में ज्ञानी श्रेष्ठ है और सभी ज्ञानियों में आचारवान श्रेष्ठ है। व्यक्ति , समाज और राष्ट्र का मूल आधार है आचार। आचार के आधार पर विकसित विचार ही जीवन का आदर्श बनता है।
आचार व्यक्ति का क्रियात्मक पक्ष है और विचार उसका ज्ञानात्मक पक्ष। ज्ञान जब क्रिया से मिलता है तब आचार बन जाता है। व्यक्ति का अच्छे और बुरे का मापदंड ज्ञान से नहीं, उसके आचरण से होता है। जैन आचार का मूल आधार है आत्मा। आत्मा ही कर्मो की कर्ता और भोक्ता है। आत्मा में ही कर्म से मुक्त होकर परमात्मा बनने की क्षमता है। सम्यक् आचरण करने वाली आत्मा परमात्मा बन जाती है। मिथ्यात्व आचरण करने वाली आत्मा जन्म मरण में परिभ्रमण करती रहती है।
साध्वी ने कहा कि पहले जानो, फिर उसका आचरण करो। क्योंकि ज्ञान के बिना आचरण का निर्धारण नहीं हो सकता। आचार बिना ज्ञान अधूरा है। प्रतिदिन आयोजित एक घंटे के अनुपूर्वी जाप अनुष्ठान के शनिवार के लाभार्थी पोरवाड ,देरासरिया एवं ओस्तवाल परिवार रहे।
Published on:
02 Oct 2023 06:42 pm
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