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सौरमंडल में लघु ग्रह जैसे नए पिंड का प्रवेश

हमारे सौरमंडल में एक नए पिंड ने प्रवेश किया है जिसको लेकर वैज्ञानिकों में कौतूहल है
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बैंगलोर

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Shankar Sharma

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Updated: 9 Nov 2017, 10:26 PM IST

Solar System

बेंगलूरु. हमारे सौरमंडल में एक नए पिंड ने प्रवेश किया है जिसको लेकर वैज्ञानिकों में कौतूहल है। यह पिंड लघु ग्रह जैसा है मगर इसकी गति किसी लघु ग्रह या धूमकेतु के सदृश्य नहीं है। इसका पथ अति परवलयाकार है और ऐसे पथ वाले पिंडों के बारे में कहा जाता है कि ये मेहमान बनकर आते हैं और वापस कहीं चल देते हैं।

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि पिछले महीने ही खगोल वैज्ञानिकों ने सौरमंडल में आए इस नए आगंतुक को खोज निकाला। यह हमारे सौरमंडल में किसी अन्य तारे या उसके ग्रह द्वारा अपने पथ से ऐसे छितरा दिया गया कि वह हमारे सूर्य के आकर्षण में बंधकर भीतरी सौरमंडल में घुसा चला आया।

इस पिंड के हमारे सौरमंडल में प्रवेश करने में हजारों साल लगे। इससे पहले वर्ष 1997 में एक वैज्ञानिक पत्रिका में ऐसी घटना की भविष्यवाणी एल एन स्टर्न नामक खगोल वैज्ञानिक ने की थी। वे नहीं जानते थे कि यह बात 20 साल बाद ही सच साबित हो जाएगी। जैसे ही इस नए पिंड के आगमन के संकेत आए बड़े से बड़े दूरदर्शी इसकी टोह में लग गए।

जब यह पृथ्वी के निकट से गुजरा तो 19 अक्टूबर की रात को ही इसका पता चला। हवाई स्थित 1.8 मीटर के दूरदर्शी से ली गई तस्वीरों में केवल बिंदु के स्थान पर इस मेहमान में एक रेखा बना दी। इससे पहली रात को ली गई तस्वीर में भी जब इसी पिंड की मौजूदगी का पता चला तो अन्य वेधशालाओं को भी यह सूचना दे दी गई।

पिंड की गति लघु ग्रह या धूमकेतु जैसी नहीं
विलक्षण बात यह है कि इसकी गति किसी लघु ग्रह या धूमकेतु जैसी नहीं है। इसका पथ अति परवलयाकार है। इस आगंतुक पिंड को 1/ओमुआमुआ नाम दिया गया है। इसने सौरमंडल में लगभग 25.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से प्रवेश किया। यह लायरा तारा समूह की दिशा से आया। इसी दिशा में हमारा सौरमंडल धीरे-धीरे चल रहा है। इस कारण ही इसे घर के बाहर से आया मेहमान कहा गया है।

इसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा के तल से समकोण पर है। पिछली 14 अक्टूबर को यह पृथ्वी से 2.4 करोड़ किमी की दूरी से गुजर गया। अब यह पेगासस तारासमूह की ओर 44 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से जा रहा है। चूंकि, इसकी रफ्तार थोड़ी ज्यादा थी इसे केवल 10 दिन के लिए ही प्रक्षेण में लिया जा सका। इसके गठन के बारे में अभी ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन यह कुछ 100 मीटर आकार का है।

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