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हैलो आर्बिट में महत्वपूर्ण अध्ययन करेगा आदित्य एल-1

जल्द चालू किया जाएगा मैग्नोमीटरपथ सुधार के बाद ठीक हालत और सही पथ पर आदित्य एल-1

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हैलो आर्बिट में महत्वपूर्ण अध्ययन करेगा आदित्य एल-1

हैलो आर्बिट में महत्वपूर्ण अध्ययन करेगा आदित्य एल-1

बेंगलूरु.
देश की पहली सौर वेधशाला आदित्य एल-1 के पथ में सुधार किया गया है। सूर्य के अध्ययन के लिए भेजा गया यह मिशन लग्रांज-1 बिंदु की ओर अग्रसर है। लग्रांज-1 सूर्य और धरती के बीच लगभग 15 लाख किमी की दूरी पर है। इस बिंदु पर स्थापित किए जाने के बाद यह आदित्य एल-1 की नजर में सूर्य कभी ओझल नहीं होगा और लगातार सूर्य का अध्ययन किया जा सकेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा है कि, आदित्य एल-1 का एक पथ सुधार मैनुवर (टीसीएम) किया गया। इसके लिए यान में मौजूद ईंधन 16 सेकेंड तक फायर किया गया। आदित्य एल-1 को लग्रांज-1 पर पहुंचाने के लिए यह पथ सुधार आवश्यक था। पिछले 19 सितम्बर को ट्रास लंग्रांजियन-1 इनसर्शन (टीएल-1 आइ) की जटिल प्रक्रिया पूरी करने के बाद पथ की समीक्षा की गई। इस दौरान यह पाया गया कि, यान को लग्रांज-1 कक्षा में पहुंचाने के लिए पथ सुधार आवश्यक होंगे। उसी के अनुरूप यह प्रक्रिया पूरी की गई। इसरो ने कहा है कि, पथ सुधार के बाद यान ठीक हालत में और सही रास्ते पर है। टीसीएम से यह सुनिश्चित हुआ है कि, अंतरिक्षयान हैलो आर्बिट में पहुंचने के लिए उचित रास्ते पर है।
अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन
इस बीच इसरो ने कहा है कि, आदित्य एल-1 के उपकरण (पे-लोड) मैग्नेटोमीटर को अगले कुछ दिनों में चालू किया जाएगा। दरअसल, एडवांस्ड ट्राइ एक्सल हाई रिजोल्यूशन डिजिटल मैग्नेटोमीटर का विकास लेबोरेटरी फॉर इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम्स (लिओस) और यू आर राव उपग्रह केंद्र बेंगलूरु ने संयुक्त रूप से किया है। इस उपकरण का उपयोग कर अंतरग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र के परिमाण और प्रकृति को मापा जा सकता है। चूंकि, आदित्य एल-1 हैलो आर्बिट में प्रवेश करने वाला है इसलिए इस पे-लोड से कई अहम आंकड़े मिल सकते हैं। हैलो आर्बिट में विभिन्न ग्रहों के चुंबकीय बल अंतरिक्षयान पर प्रभावी होने लगते हैं। इस आर्बिट से गुजरना किसी भी अंतरिक्षयान के लिए काफी चुनौतीपूर्ण भी होता है। मैग्नेटोमीटर इस दौरान सूर्य, पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों के परस्पर चुंबकीय प्रभाव और प्रकृति के बारे में अहम आंकड़े दे सकता है।
यात्रा के दौरान भी यान से मिल रहे अहम आंकड़े
इससे पहले अपनी यात्रा के दौरान ही आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट(एसपेक्स) के एक उपकरण सुप्रा थर्मल एंड इनरजेटिक पार्टिकल स्पेक्ट्रोमीटर (स्टेप्स) ने अहम वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए। इस पे-लोड के छह सेंसर अलग-अलग दिशाओं की ओर उन्मुख हैं और 20 केइवी/न्यूक्लियॉन से 5 एमइवी/न्यूक्लियॉन तक के सुपर-थर्मल और ऊर्जावान आयनों का मापन करने में सक्षम हैं। धरती की कक्षा में चक्कर लगाते हुए आदित्य ल-1 के जुटाए गए इन आंकड़ों का विश्लेषण कर वैज्ञानिक पृथ्वी के आसपास इन कणों के व्यवहार के बारे में अध्ययन कर सकते हैं। विशेषकर धरती के चुंबकीय क्षेत्रों में इन कणों का अध्ययन काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। इस उपकरण (स्टेप्स) को 10 सितम्बर को चालू किया गया था। तब अंतरिक्षयान आदित्य एल-1 धरती से लगभग 50 हजार किमी की दूरी पर था। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार स्टेप्स से आंकड़े एकत्रित करने का काम उसके 110 दिनों की यात्रा के दौरान भी जारी रहेगा।