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केआर अस्पताल में लगी उन्नत सीटी स्कैन मशीन, सुधरेंगी सेवाएं

6.6 करोड़ रुपए में जर्मनी से किया गया आयातित परीक्षण शुरू, मुख्यमंत्री को उद्घाटन का आमंत्रण
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बैंगलोर

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Rajendra Shekhar Vyas

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Updated: 7 Nov 2018, 4:17 PM IST

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केआर अस्पताल में लगी उन्नत सीटी स्कैन मशीन, सुधरेंगी सेवाएं

मैसूरु. के. आर. अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में अब उन्नत सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्नत व हाईटेक 128 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन को जर्मनी से लाया गया है। जिसके कीमत 6.6 करोड़ रुपए है। अस्पताल के अनुसार नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाद के. आर. अस्पताल ही दूसरा सरकारी अस्पताल है जहां यह मशीन उपलब्ध है। दोहरी स्रोत प्रौद्योगिकी से लैस यह मशीन बिना किसी गलती के तेजी से स्कैन करने में सक्षम है। इस दौरान मरीज को सांस रोकने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। इससे बच्चों के स्कैन में परेशानी नहीं होगी। मैसूरु मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के डीन व निदेशक डॉ. सी.पी.नंजाराज ने सोमवार को बताया कि स्कैन की सुविधा के अभाव में मरीजों को इसके लिए अन्य अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब मरीजों को सहूलियत हो जाएगी। मशीन लगाने का कार्य पूरा हो गया है। विशेषज्ञ मशीन का ट्रायल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी मशीन को उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया है।
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड ने दी हरी झंडी
रेडियोलोजी विभाग के डॉ. संजय ने बताया कि विभाग में हर दिन करीब 1000 मरीज विभिन्न जांच कराते हैं। जिसमें करीब 600 एक्स-रे, 250-300 अल्ट्रासाउंड और 100-150 सीटी स्कैन शामिल हैं। नई मशीन से कम समय में ज्यादा से ज्यादा मरीजों की जांच हो सकेगी।परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड से सभी जरूरी इजाजत मिल चुकी है।

जांच में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका अहम
मणिपाल. अपर पुलिस महानिरीक्षक डॉ. एमए सलीम ने कर्नाटक मेडिको-कानूनी समाज की ओर से मणिपाल स्थित कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज में आयोजित फॉरेंसिक मेडिसिन विषय पर तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि अपराध के बाद किसी भी जांच में फॉरेंसिक विज्ञान और इसके विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ा रहा है। सरकार ने पीडि़तों के लिए कानून में बदलाव किया है। उन्हें कई अधिकार दिए गए हैं। लेकिन इसके बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं है। डॉ. पूर्णिमा बलिगा ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था में फॉरेंसिक विज्ञान का विस्तार हुआ है। इसकी अहमियत बढ़ती जा रही है। चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने की जरूरत है। जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी, डॉ. रोहिणी ने सम्मेलन का जर्नल जारी किया।

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